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अगर कोरोना नहीं गया तो…

अभी थोड़ी देर पहले छत से सड़कें देख रहा था इक्का दुक्का लोग दिख रहे है, सब कुछ शांत है जैसे समय ठहर सा गया हो, दरवाजा बंद करके अन्दर बैठा ही था कि चिड़ियाँ के चहकने की आवाज सुनाई दी. सोच रहा हूँ जहाँ हर समय गाड़ियों के हार्न, स्कूटर कार की आवाजें, सुनाई देती थी आज वहां चिड़ियाँ की चहकने आवाज कहाँ से आ गयी..?

हम तो भूल ही गये थे ना कि ये भी कोई जीव होते है और इस पृथ्वी पर इनका भी हिस्सा है. क्योंकि भाई हम तो इन्सान ना सड़कें हमारी, जंगल हमारे, आसमान हमारा सब जगह कब्ज़ा हमारा. फिर ये चिड़ियाँ क्यों चहक रही है.

ध्यान आया दुनिया का सबसे ताकतवर जीव जिसे इन्सान कहते है घरों में कैद है, एक छोटे से महीन से वायरस से डरकर जो इतना सूक्ष्म है कि सूक्ष्मदर्शी से देखना पड़ता है, उसी के डर अमेरिका जैसी सुपर पॉवर दुबक गयी, दुनिया में सबसे बड़ी सेना रखने वाला चीन घुटनों पर ला दिया, इटली के डॉक्टर इन्सान जैसा दूसरा जीव बनाने की तैयारी में थे अब अपने इंसानों को भी नहीं बचा पा रहे है. स्पेन के नास्तिक जो कहते थे भगवान कुछ नहीं होता सब फालतू की चीजें है वो खोफ में हाथ जोड़े खड़े है कि अब ईश्वर ही किसी तरह स्पेन के लोगों को बचा सकता है, उत्तर कोरिया का तानाशाह जो दुनिया को मिटाने की बात करता था आज अपने ही लोगों नहीं बचा पा रहा है और खुद को इस्लाम का रहनुमा बताने वाला ईरान अपने देश के मुसलमानों के शवों को छिपा रहा है.

अगर अभी इन्सान अपनी किसी ताकत के बल के अहंकार में जी रहा है तो भूल जाइये कि हम भी कुछ है और कुछ कर सकते है! कोरोना अभी एक ट्रेलर है इसे देखकर समझ जाइये कि पूरी पिक्चर की तस्वीर कैसी होगी.? क्योंकि ट्रेलर में ही सब रिश्ते नातों के पैर उखड़ते दिखाई दे रहे है. एक बेटा माँ से दूर भाग रहा है एक पत्नी पति से कह रही है आप बाहर से आये हो मुझसे और बच्चों से दूर ही रहना, विदेश से कोरोना पीड़ित बेटे को माँ कह रही है सीधा घर मत आना कुछ दिन कहीं बाहर बिता लेना. जो प्रेमी प्रेमिका का हाथ पकड़कर सात जन्मों तक के वादे कर रहा था वो गायब हो गया. दोस्त दोस्त को घर नहीं बुला रहा है. ये कैसी खामोशी है? घर में सन्नाटा पसरा है, लोग अलग-अलग कमरों में बैठे है. जहाँ बाहर कभी इंसानों घूमते थे आज कोरोना घूम रहा है, कोई पुलिस वाला चालान काटने की हिम्मत नहीं कर रहा है. रफाल अपाचे चिनूक जैसे लड़ाकू विमान मिसाइल परमाणु बम लिए दुनिया की सभी सेनाएं सेना बेबस नजर आ रही है. हर जगह लॉकडाउन है कस्बे बंद, शहर बंद, बस बंद ट्रेन हवाई जहाज सब कुछ बंद है. एकदम मध्यकाल की तरह राजधानी दिल्ली में बाहर से आये लोग सैकड़ों किलोमीटर दूर वापिस अपने घरों के लिए पैदल जा रहे है.

इटली में विज्ञान लाचार दिख रहा है, बड़ी-बड़ी गाड़ी खड़ी है महंगे बंगले खाली पड़े है. यहाँ तक कि धर्मस्थल बंद हो गये मैंने देखा रोम में वेटिकंन सिटी के पादरी को अकेला खड़ा जीसस से प्रार्थना कर रहा है दुनिया के दुःख हरने वाला पोप अपने ही देश में मास्क लगाकर रहम की भीख मांग रहा है. भारत में चंगाई सभा लगाकर मरीजो का इलाज करने वाले ईसाई पादरी पवित्र जल का छीटा देकर गंभीर रोगों को भगाने का ढोंग करने वाले सेनेटाईजर का इस्तेमाल कर रहे है.

यानि सब की पोल खुल गयी या कहो सब की अकड निकल गयी अभी तक यह सब कुछ हलीवुड की मूवी में देखते थे लेकिन अब सब कुछ यथार्थ में घट रहा है..लगता है तीसरा विश्वयुद्ध शुरू हो गया है. जिसमें एक तरफ इन्सान द्वारा इजाद की गयी सारी विज्ञान की ताकत है दूसरी तरफ सूक्ष्म सा वायरस जो पूर्व में हुए दो विश्व युधों की तरह लाशें गिनवा रहा है.

लोग स्क्रीन पर मृतकों के आंकड़े पढ़ रहे है संक्रमितों की संख्या बताई जा रही है. जिन्दा बचे इंसानों को बचाने की जद्दोजहद हो रही है. लेकिन सवाल ये है आखिर कब तक? यदि अभी भी प्रकृति से लड़ना नहीं छोड़ा तो इस ट्रेलर के बाद की मूवी की कल्पना आप नहीं कर सकते है क्योंकि आपने इस ट्रेलर की भी कल्पना नहीं की थी. अभी भी वक्त है संभल जाइये एक दिन तालियाँ थालियाँ बजाकर महामारी से लड़ रहे डॉक्टरों का शुकिर्याँ अदा किया जा सकता है लेकिन महामारी को अब लम्बे समय चकमा नहीं दिया जा सकता. समुन्द्र से पहाड़ तक जमीन से लेकर आसमान तक, जीवों पर दया से लेकर से पशु पक्षियों तक यदि हमने प्रकृति को अपना नहीं समझा तो प्रकृति भी हमसे कोई लगाव नहीं करेगी वो भला अपने दुश्मन को अपना क्यों समझेगी. वो अपना बदला लेगी. एक झटके में इंसानी ताकत के गुरुर को तोड़ डालेगी. ध्यान रहे सूरज फिर निकलेगा, पक्षी फिर भी चहकेंगे, हवाएं भी होगी लेकिन हम और तुम ना होंगे..

लो फिर एक चिड़ियाँ ने चहकना शुरू कर दिया अब मुझे चिड़ियाँ की व्यथा पर लिखी महादेवी वर्मा की कविता की कुछ पंक्ति याद गयी.

घर में पेड़ कहाँ से लाएँ,
कैसे यह घोंसला बनाएँ!
कैसे फूटे अंडे जोड़े,
किससे यह सब बात कहेगी!
अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी?

Rajeev choudhary 

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