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अभिव्यक्ति बनाम देशद्रोह

Feb 27 • Samaj and the Society • 582 Views • No Comments

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दिल्ली के रामजस कॉलेज की चर्चा आजकल सुर्ख़ियों में हैं। कुछ दिनों पहले JNU में देशद्रोह के नारे लगाने वाले उमर खालिद को अपने शोध पर व्याख्यान देने के लिए बुलाया गया था। उमर खालिद के व्याख्यान का विरोध ABVP द्वारा किया गया। साम्यवादी मीडिया ABVP के विरोध को गुंडई और खालिद के देशविरोधी नारों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बता रहा हैं। भारत के अभिन्न अंग कश्मीर को आज़ाद करने की बात केवल पाकिस्तान समर्थक करते है। ऐसे में देशद्रोह के आरोप में जमानत पर रिहा खालिद को व्याख्यान के लिए बुलाना देशद्रोही को प्रोत्साहन देने के समान है। खालिद चाहे शैक्षिक रूप से कोई बहुत बड़ा बुद्धिजीवी भी हो तब भी देशद्रोही को किसी प्रकार की छूट नहीं होनी चाहिए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को समझना अत्यन्त आवश्यक है। स्वामी दयानंद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बड़े पक्षधर थे। परंतु उन्होंने दो विशेष नियमों के पालन करने पर विशेष बल दिया था। प्रथम अभिव्यक्ति का उद्देश्य समाज सुधार होना चाहिए और दूसरा अभिव्यक्ति करने वाला व्यक्ति निष्पक्ष होना चाहिए। साम्यवादी हिन्दू समाज की मान्यताओं पर घटिया तरीके से समीक्षा करने को अभिव्यक्ति बताते है क्योंकि उनका उद्देश्य समाज सुधार नहीं अपितु गन्दगी फैलाना हैं। साम्यवादियों का दोगलापन देखिये एम.एफ, हुसैन द्वारा हिन्दू देवी देवताओं की अश्लील तस्वीरें बनाना उनके अनुसारअभिव्यक्ति है जबकि मुहम्मद साहिब का कार्टून बनाने वाले डेनिश पत्रकारों का ये लोग विरोध करते है क्योंकि वह धार्मिक असहिष्णुता हैं। उनके इस दोगले और विषैले प्रचार से कुछ युवा भ्रमित हो जाते है। यही साम्यवादियों का उद्देश्य होता है। इस विषैले प्रचार का प्रभाव देखिये। गुरमेहर कौर के नाम से दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली एक छात्रा ने ABVP के विरोध में सोशल मीडिया में एक मुहीम चलाई है। इस छात्रा के पिता ने कारगिल के युद्ध में अपना बलिदान देश के लिए पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के विरोध में दिया था। मेरे   गुरमेहर कौर से कुछ प्रश्न है। आशा है वो इसे troll का नाम न देकर अपनी योग्यतानुसार उनका उत्तर देगी।

1. क्या वह उमर खालिद के कश्मीर पर दिए गए बयान कि कश्मीर को चाहिए भारत से आज़ादी का समर्थन करती है?
2. क्या वह पाकिस्तान द्वारा कश्मीर में चलाई जा रही भारत विरोधी गतिविधियों का समर्थन करती है?
3. क्या वह यह मानती है कि भारत ने कश्मीर पर नाजायज कब्ज़ा किया हुआ है?
4. क्या वह बुरहान वानी जैसी आतंकवादियों को शहीद अथवा आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाला मानती है?
5. क्या वह आतंकवादियों और पाकिस्तान का समर्थन करने वाले कश्मीरी अलगाववादी नेताओं का समर्थन करती है?
6. क्या वह कश्मीरियों पंडितों को दोबारा कश्मीर में न बसने देने के अलगाववादीयों की सोच का समर्थन करती है?
7. क्या वह उमर खालिद के अभिन्न मित्र कन्हैया द्वारा भारतीय सैनिकों को बलात्कारी बताने वाले बयान का समर्थन करती है?
8. क्या कश्मीर में बलिदानी हुए सैनिकों को मारने वाले आतंकवादियों को वह आज़ादी का मसीहा, परवाना और संघर्ष करने वाला मानती है?
9. क्या पाकिस्तान में बैठकर देशविरोधी काम करने वाले हाफ़िज सईद और मुल्ला उमर के बयानों का वह समर्थन करती है?
10. क्या हमारे देश के वीर सैनिकों पर पत्थर मारने वालों को भटका हुआ युवक कहकर वह उनके कुकृत्य का समर्थन करती है?

अगर आप मोहतरमा ऐसा नहीं मानती तो आप ABVP का विरोध क्यों कर रही है? आपके पिता ने इस देश के लिए अपना बलिदान दिया था। और आप अपने पिता द्वारा दिए गए बलिदान को अपमानित करने का प्रयास कर रही है।

ABVP  देशद्रोही उमर खालिद, कन्हैया कुमार का विरोध कर रही है।  और आप ABVP का समर्थन करने के स्थान पर उन्हीं का विरोध करने बैठ गई। इससे आपकी बुद्धिमता कम आपका मानसिक अपरिपक्वता अधिक प्रतीत होती है।

आशा हैं आप हमारे प्रश्नों का उत्तर देगी। सत्य-असत्य में भेद करना सीखेगी। देशभक्त और देशद्रोही में अंतर करना सीखेगी।

डॉ विवेक आर्य

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