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एकता कपूर तुम क्या जानों जवान की पत्नी का दर्द

पिछले दिनों एकता कपूर ओटीटी प्लेटफॉर्म ऑल्ट बालाजी पर वेब सीरीज “ट्रिपल एक्स” के सीजन-2 अश्लीलता फैलाने और राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान के आरोप में एफ आई आर दर्ज की गई है मध्य प्रदेश के इंदौर में अन्नपूर्णा पुलिस थाने वाल्मीक सकरगाये और नीरज याग्निक की शिकायत पर आईपीसी की धारा 294 और 298 के साथ यह एफ आई आर दर्ज की गयी है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस वेब सीरीज के एक दृश्य में भारतीय सेना की वर्दी को बेहद आपत्तिजनक तौर पर पेश करते हुए राष्ट्रीय प्रतीक चिह्नों का अपमान किया गया है.

सबसे पहले तो मेरा उन दोनों भाइयों वाल्मीक सकरगाये और नीरज याग्निक को प्रणाम जिन्होंने इस एफ आई आर को दर्ज कराया. इसके बाद में जो कुछ कहूँगी एक एक शब्द सुन लेने चाहिए क्योंकि आज मेरे अन्दर एक आर्मी के जवान की पत्नी बोल रही है.

आज आप एक आकांशा को नही सुन रहे बल्कि एक उस पत्नी को सुन रहे है जिसका पति सरहद पर चीन की सेना के सामने सीना ताने खड़ा है उसी वर्दी को पहने जिसे एकता कपूर ने दो पैसे कमाने के लिए अपनी वेब सीरिज में तार-तार किया है.

मैं फ़िल्मी जिन्दगी जीने वालों के संस्कार पर बाद में बात करुँगी पहले मैं एक फौजी की पत्नी के संस्कार आपके सामने रख रही हूँ जिसे एकता जैसी महिला नहीं समझ सकती क्योंकि उनके खून में ऐसे संस्कार जाते ही नहीं, बचपन में पैदा हुई अपने बाप को नाचते हुए देखा थोड़ी बड़ी हुई अपनी माँ को नाचते हुए देखा और होश सम्हाला खुद को सैंकड़ो नाचने कूदने वालों की भीड़ में पाया.

हमारा देश क्या है इसकी सीमाएं कहाँ तक है एक सेना का जवान कितने अपनों को छोड़कर किस हाल में उस सीमा की रक्षा करता है शायद एकता को नही पता होगा. पता भी कहाँ से होगा जिस महिला को अपनी संस्कृति और सीमाओं का ज्ञान ना हो उसे देश की सीमाओं का ज्ञान कहाँ से आएगा.

एक लड़की जब थोड़ी बड़ी होती है वो सिंड्रेला की तरह सपने देखती है कि उसकी जिन्दगी में एक दिन कोई राजकुमार आएगा वो राजकुमारी की तरह रहेगी. हालाँकि अब ऐसे सपने कोई लड़की नही देखती वो अब खुद के दम पर कामयाबी की बुलंदी छूना चाहती है लेकिन एक लड़की जो सेना के एक जवान से शादी करती है उसके सपने कुछ ओर होते है, जिस दिन उसकी मांग में सिंदूर भरा जाता है जिस दिन वो अग्नि के सामने सात फेरे लेती है उसी दिन वो अपने सपने अलग रख देती है और उसका एक सपना रह जाता है कि वह अपने पति से साथ इस मात्रभूमि की रक्षा के काम में अपना दिन रात एक कर देगी.

उसे अपने पति और इस भारत भूमि की चिंता में दिन में कई बार रोना भी आएगा लेकिन वह अपने आंसू न परिवार के सामने प्रकट करेगी और न पति के सामने वो सेना में तो नही होती लेकिन जो सीमा पर प्रहरी बनकर खड़ा है उसकी ताकत होती है उसे हिम्मत देती है उसे होसला देती है.

आखिर एक लड़की जो ना अपने लिए किसी डॉक्टर का चुनाव करती न इंजिनियर और न फ़िल्मी हीरों वो चुनाव करती है सिर्फ सेना के एक जवान का क्योंकि उसका हीरो वही होता है जो इस देश के लिए अपने प्राण देने और इस माटी की रक्षा की रक्षा के लिए दुश्मन के प्राण लेने में संचोक न करे.

लेकिन आज वह पत्नी हार गयी है और उसे हराने वाले बाहरी दुश्मन नहीं बल्कि अन्दर बैठे दुश्मन है जो दो पैसे कमाने के लिए अब उसके चरित्र को बेचने लग गये है सेना की वर्दी को तार-तार कर रहे है.

एकता की वेब सीरीज में वर्दी नही फटी बल्कि इस देश की अस्मिता फटी है किसी सेना के जवान की पत्नी का अपमान नहीं हुआ वो कोडी की महिला क्या बराबरी करेगी एक सेना के जवान की पत्नी के त्याग समर्पण देशभक्ति की, हाँ जब वो वर्दी फट रही थी तब भारत माता का चीर जरुर फट रहा था एक भारत माता के बेटे जो उसकी रक्षा के लिए सरहद पर माइनस तापमान में खड़ा है उसका सीना जरुर फट रहा होगा.

मुझे नहीं पता एकता की वेब सीरिज को देखकर लोग कैसे चटकारे ले रहे है इसलिए में चटकारे लेने वालों से कहना चाहती हूँ कि अगर आप चटकारे ले रहे है तो आपके इस चटकारे में हमारे देश की सैनिको की लाखों पत्नियों का अपमान है, अपमान उस माँ का है जो इकलोते बेटे को सरहद पर भेज देती है, अपमान उस बहन की राखी है जो रक्षा बंधन पर उसकी तस्वीर पर राखी बांध देती है.

ये तो बात थी देश के सैनिकों की पत्नियों के संस्कारों की अब इन फ़िल्मी दुनिया की दो कोडी की नचनियों की बात करे इनके संस्कार देखिये तीन तीन शादी करने वाली फ़िल्मी नायिका रुपहले पर्दे पर संस्कृति का ज्ञान झाड़ते मिलेगी, अरबाज को छोड़कर मलाइका अर्जुन कपूर के साथ हो लेती है, एक पल में शादी करती है दूसरे पल में तोड़ देती है इनके बच्चें ड्रग्स लेते है और आज ये लोग सेना की वर्दी को अपमान कर रहे है अंत में इतना कहूंगी ये तो ये लोग अपनी देश की सेना धर्म और संस्कृति का सम्मान करना नहीं जानते या फिर एकता जैसी महिला अपनी गन्दी मानसिकता वेब सीरीज के माध्यम से किसी एजेंडे तहत समाज में परोस रही है.

लेखिका- आकांशा राय

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