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एक छोटी सी लड़की अरब की हो सकती है

Sep 22 • Samaj and the Society • 631 Views • No Comments

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हैदराबाद में पुलिस ने एक बड़े अरबी विवाह रैकेट का खुलासा करते हुए ओमान और कतर के आठ नागरिकों और तीन काजियों को गिरफ्तार किया है. रैकेट के शिकारों में नाबालिग लड़कियां भी शामिल थीं. गिरफ्तार किए गए काजियों में मुंबई के मुख्य काजी फरीद अहमद खान शामिल हैं. वहीं हैदराबाद के चार लॉज मालिकों और पांच दलालों को भी गिरफ्तार किया गया है. बताया जा रहा है कि ये सब इस्लामी एक विवाह प्रथा (मुताह निकाह) के नाम पर भारत में नाबालिग बच्चियों का यौन शोषण करने आये थे.

दरअसल अरबी शब्द मुताह का अर्थ है (आनंद, मज़ा) मसलन आनंद के लिए शादी. जबकि भारतीय परिवेश में विवाह एक पारिवारिक सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा माना गया है. लेकिन अरबी शेख इसे आनंद का विषय समझकर दक्षिण भारत में आते रहते है. पिछले दिनों एक महिला ने पुलिस से शिकायत की थी कि कुछ दलालों की मदद से उनके पति ने अपनी नाबालिग बेटी को 70 वर्षीय ओमानी नागरिक अहमद अब्दुल्ला को बेच दिया था. लड़की ओमान में फंस गई है. शायद ऐसी शिकायते भारत के शहर हैदराबाद में खाड़ी के अरबवासियों के गलत आचरण की लगातार पोल खोल रहे हैं.

मामला आज से नही है बल्कि  आज से लगभग 12 साल पहले टाइम्स ऑफ इंडिया समाचार पत्र में मोहम्मद वाजिहुद्दीन ने “एक छोटी सी लड़की अरब की हो सकती है” शीर्षक से और आर. अखिलेश्वरी ने डेक्कन हेराल्ड में “Fly by night bridegroom” शीर्षक से लेख लिखा था. वाहिजुद्दीन ने इस चर्चा को आरंभ करते हुए लिखा था कि नई उर्जा वाले ये पुराने शिकारी हैं. प्राय: दाढ़ी रखने वाले और लहराते चोंगे के साथ पगड़ी पहनने वाले ये अरब. हैदराबाद की गलियों में मध्यकाल के हरम में चलने वाले राजाओं की याद दिलाते हैं. जिसे हम इतिहास का हिस्सा मान बैठे हैं. वियाग्रा का सेवन करने वाले ये अरब इस्लामी विवाह के नियम “मुताह निकाह” की आड़ में शर्मनाक अपराध को अंजाम देते हैं..वाजिहुद्दीन ने इस समस्या को और स्पष्ट करते हुए लिखा था कि ये लोग उस परिपाटी का दुरुपयोग करते हैं जिसके द्वारा एक मुस्लिम एक साथ चार पत्नियां रख सकता है. अनेक बूढ़े अरबवासी न केवल अधिकांश नाबालिग हैदराबादी लड़कियों से विवाह करते हैं. वरन् एक बार में ही एक से अधिक नाबालिग लड़कियों से विवाह कर डालते हैं. इस घटिया काम ये अरबवासी टीन एज की कुंवारी लड़कियों को प्राथमिकता देते हैं.

ये अरबवासी सामान्यत: इन लड़कियों से थोड़े समय के लिए विवाह करते हैं और कभी कभी तो केवल एक रात के लिए. वाजिहुद्दीन की रिपोर्ट के अनुसार विवाह और तलाक की औपचारिकता एक साथ पूरी कर ली जाती है .और अखिलेश्वरी के अनुसार इन बुजुर्ग अरबवासियों की वासना की आग को बुझाने के लिए ये लड़कियां केवल पांच सात हजार रु में भी उपलब्ध हैं.

उसी समय भारत के एक टेलीविजन कार्यक्रम में आठ संभावित दुल्हनों को दिखाया गया था जो अरबवासियों को प्रस्तुत की जानीं थीं. यह एक वेश्याग्रह जैसा प्रतीत होता था. इन लड़कियों को अरबियों के समक्ष लाया गया और उन्होंने इनका बुर्का उठाकर उनके बालों में अपनी अंगुलियां फेरी और उनकी अंगुलियों को भली प्रकार जांच कर द्विभाषिय की मदद से उनसे बात की .

वाजिहुद्दीन एक विशेष मामले का उदाहरण देते उस वर्ष लिखा था कि हैं. एक अगस्त 2005 को संयुक्त अरब अमीरात् के 45 वर्षीय शेख़ रहमान इस्माइल मिर्जा अब्दुल जब्बार ने हैदराबाद के ऐतिहासिक चार मीनार इलाके में 70 वर्षीय दलाल जैनाब को इस सौदे के लिए पकड़ा. इस दलाल ने 13 और 14 साल की फरहीन सुल्ताना और हिना सुल्ताना को 25 हजार रु पर राजी किया. उसके बाद उसने काजी को तैयार कर इस्लामिक प्रावधान के अनुरुप इन लड़कियों की शादी अरबवासी से कर दी. रात की शादी के बाद सुबह अरबवासी ने उन्हें छोड़ दिया. उस शादी के लिए इतना समय पर्याप्त था .

इन शादियों को जायज बताते हुए उस समय हैदराबाद के मुसलमानों की प्रमुख पार्टी मजलिसे इत्तिहादुल मुस्लमिन के पार्टी अध्यक्ष सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी ने तो तब यहां तक कहा था कि “आप इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि ऐसी शादियों से अनेक परिवारों का भाग्य बदल गया है. इस व्यवसाय का आडंबर इसका सबसे बुरा पक्ष है. स्पष्ट रुप से वेश्यावृत्ति करना और उसे स्वीकार करना ठीक है. बजाय इसके कि धार्मिक प्रावधान का सहारा लेकर नकली शादी करना और इसे धर्म का अंग मानना. वाजिहुद्दीन इन अरबवासियों की तुलना मध्यकालीन राजाओं से करते हैं तो समानता भी स्पष्ट है .

स्थानीय लोग नाबालिग लड़कियों को सेक्स पर्यटन के लिए प्रसन्नता पूर्वक उपलब्ध कराते हैं. अरबवासियों का यह सेक्स पर्यटन भारत तक ही सीमित नहीं है दूसरे गरीब़ देशों में भी फैला है.

यह व्यवसाय समस्या का एक पहलू है जो सउदी अरब और खाड़ी देशों में फैली है. खाड़ी देशों की समस्यायें जैसे रखैल रखना, जबरन मजदूरी, अनुबंध के आधार पर घर में बंधुआ मजदूर रखना. ऐसी समस्यायें हैं जिनपर ध्यान नहीं दिया गया है और न ही इनका समाधान किया गया है. एक सउदी धर्मशास्त्री ने तो उस समय आगे बढ़कर दासता को तो इस्लाम का अंग बताते हुए कहा कि जो भी इसे समाप्त करने की बात करता है वह काफिर है. जब तक बिना प्रतिबंध के ऐसे विचार सामने आते रहेंगे इनका दुरुपयोग भी हमें देखने को मिलेगा .

इस्लामिक कानून की आड़ में मुस्लिम नाबालिगों का सौदा मुस्लिम विश्व में पूर्व आधुनिक तरीकों के वर्चस्व की ओर संकेत करता है. जबकि हर एक बात किसी धर्म के खिलाफ नहीं होती दुनिया में बहुत सारी बाते मानवता की नजर से भी देखी जानी चाहिए शायद इसके बाद धर्म छोटा और मानवता बड़ी दिखाई देगी.

-लेख राजीव चौधरी

 

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