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एक पाकिस्तान में कितने पाकिस्तान

पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क है जो अपने क्षेत्रफल के हिसाब से विश्व के अखबारों में ज्यादा स्थान घेरता है| यह करिश्मा कोई उसकी उदार व्यवस्था उसकी कोई लोकतांत्रिक या आर्थिक नीति नहीं है, जिससे की विश्व समुदाय आकर्षित होकर उसे अखबारों के पन्नों में जगह देता हो| बल्कि पाकिस्तान के अन्दर पलते आतंकवाद के कारण विश्व समुदाय चिंतित है| विडम्बना देखिये अपने अन्दर इस फलते फूलते आतंक को लेकर न तो कभी पाकिस्तान की सरकार चिंतित दिखाई देती और ना ही उसकी मीडिया| नैतिक तौर पर जिम्मेदारी की तो बात बहुत दूर की है| उल्टा अपने यहाँ बढ़ते आतंक को लेकर उसका ठीकरा भारत या अफगानिस्तान के सिर पर फोड़ने से भी गुरेज नहीं करता है|
अभी हाल ही में पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले के सारे सबूत पाकिस्तान को सौपने के बाद भी पाकिस्तान के सियासत बाज इसे पाकिस्तान को बदनाम करने की साजिश करार दे रहे है और सच कहे तो यह उनकी मज़बूरी भी है क्योंकि पाकिस्तान अपने जन्म के बाद से ही सविंधान के मुकाबले धार्मिक मौलानाओं के इशारे पर ज्यादा चलता दिखाई दिया| आज पाकिस्तान की धरती पर असन्तोष उपज रहा है| वहां की नई पीढ़ी जिसे मानवता की नई फसल भी कह सकते है वो आतंक के खरपतवार में लिपटी पड़ी है| जो लपट कभी उसने भारत के लिए तैयार की थी आज वो उसे झुलसाये जा रही है| करीब करीब पूरा पाकिस्तान जेहादी तंजीमो के कब्जे में जाता दिखाई दे रहा है| पाक सेना और मौलाना एक सुर में बोलते दिखाई दे सकते है जो भारत के खिलाफ जितना जहर उगलेगा उसे उतना ही बड़ा पद मिलता है| हालाँकि बहुत सारे जेहादी संगठन खुद भी पाकिस्तान का सिर दर्द बने है| जो भाषावाद, क्षेत्रवाद आदि में लिप्त होकर वहां हमले कर रहा है| किन्तु वहाँ की मीडिया अपने देश में बढ़ते इस धार्मिक बोझ को इस असन्तोष को भारत के माथे मढ़ रही है| दरअसल पाकिस्तान और भारत ने एक दिन आजादी उजाला देखा था| भारत तो उस उजाले की किरणों के संग मंगलग्रह तक पहुँच गया लेकिन पाकिस्तान अभी भी कश्मीर में उलझा पड़ा है| पाकिस्तान के स्वघोषित विद्वान् इस्लामिक परम्पराओं, ग्रन्थो और मुगलों के इतिहास को पढ़कर इस आशा में जी रहे है कि हमारे आकाओं ने हिंदुस्तान पर 800 साल राज किया था अब हम करेंगे!
जहाँ भारतीय समुदाय ने धार्मिक ग्रन्थों को मानवीय जीवन में उतारकर सदभाव और आपसी भाईचारे का संदेश दिया वहीं धार्मिक आधार पर बने पाकिस्तान ने अपने मजहब विशेष की पुस्तक को सविंधान से ज्यादा तरजीह दी| मुझे यह बात कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी की यह कौम सविंधान या लोकतंत्र से ज्यादा धार्मिक ग्रन्थ से काबू की जाती है और उसी से भड़काई भी जा सकती है? इस प्रसंग में एक छोटा सा उदहारण दूँ तो मई 2014 में बोको हरम के नेता अबू बक्रशेकऊ ने अफ्रीका में करीब 400 नाबालिग बच्चियों का अपहरण कर एक विडियों संदेश जारी किया था| उसने कहा था- अल्लाह ने मुझे इन लड़कियों को बेचने का आदेश दिया है और में अल्लाह के आदेश का पालन करूंगा इस्लाम में गुलामी जायज मानी जाती है और में दुश्मनों को अपना गुलाम बनाऊंगा इन लड़कियों को स्कूल में नहीं होना चाहिए था बल्कि इनका निकाह हो जाना चाहिए था क्योंकि 9 साल की हर लड़की निकाह के लायक होती है| गौरतलब है कि दुनिया भर मुस्लिम कट्टरपंथी मोहम्मद साहब द्वारा 9 साल की आयशा से निकाह का हवाला देकर आज भी इस परम्परा को कायम रखने पर जोर देते है|
ठीक यहीं हाल पाकिस्तान के कट्टरपंथी लोगों ने पाकिस्तान का किया वो धार्मिक आदेशो से देश चलाना चाहते है अभी मैने कुछ दिन पहले यूट्यूब पर पाकिस्तान के लेखक विचारक हसन निसार का एक वीडियो सुना था वे कोई इस्लामिक वैचारिक सम्मेलन को संबोधित करते कह रहे थे कि पाकिस्तान का मुसलमान बड़े फक्र से कहता है हमारी कौम ने हिंदुस्तान पर हजारों साल हकुमत की है| आज पाकिस्तान में मुस्लिम शासक है और मुस्लिम प्रजा फिर भी लोग जाहिल जीवन जीने को मजबूर है सोचो सेकड़ो साल पहले इनका जीवन कैसा रहा होगा? आज पाकिस्तान के जेहादी तत्व दुनिया को धमकाने पर लगे है ऐसी ताकतें एक न दिन पाकिस्तान को नरक बना देगी क्योंकि इनका बारूद इस्लामिक कट्टरता है अगर आज पाकिस्तान ने इसे रोक लिया तो आतंक की रोकथाम स्वयं हो जायेगी| और यह सपने जैसा है!
राजीव चौधरी

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