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क्या आज आपने “Rapes of India” और “RapeTimes” अख़बार पढ़ा?

Nov 28 • Samaj and the Society • 942 Views • No Comments

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अंग्रेजी में दो प्रसिद्द अख़बारों के नाम हैं “Times of India” और Hindustan Times भारत में जिस गति से बलात्कार या रेप की घटनाएँ बढ़ रही हैं उस हिसाब से कुछ दिनों में इन अख़बारों के नाम बदल कर “Rapes of India” और “RapeTimes” करना पड़ेगा। अचरज में मत पड़े। जब दिल्ली का नाम परिवर्तन कर उसे “Rape Capital” की संज्ञा से पुरस्कृत किया जा सकता है तो फिर यह संज्ञा देने वाले समाचार पत्रों का यथास्वरूप नामकरण क्यों नहीं हो सकता। सोचिये इन बलात्कार समाचार पत्रों के पृष्ठ कैसे होंगे?

पृष्ठ 1
आज दिल्ली में 3 और बलात्कार हुए।
तीनों बलात्कार की पीड़ित लड़कियां 5 वर्ष की आयु से कम निकली।
बलात्कार करने वाले सभी लड़के नाबालिग।
एक लड़की शौच करने निकली तब शिकार बनी।
दूसरी खेल रही थी टॉफी दिलाने के बहाने शिकार बनी।
तीसरी के किरायेदार ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
तीनों बच्ची विभिन्न हस्पतालों के चक्कर खाते के पश्चात सफदरजंग हस्पताल में भर्ती।
तीनों की हालत गंभीर, तीनों को अनेक बार सर्जरी की आवश्यकता।
सभी नाबालिग रिमांड पर। सबसे छोटे की आयु 9 वर्ष।
पृष्ठ 2
केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस को बलात्कार के लिए दोषी बताया।
केजरीवाल द्वारा यह बयान दिया गया की दिल्ली पुलिस उनकी सलाह पर ध्यान नहीं देती।
जब तक उन्हें दिल्ली पुलिस का कार्यभार, दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा और सबसे आवश्यक उन्हें भारत का प्रधान मंत्री नहीं बनाया जायेगा तब तक दिल्ली में बलात्कार नहीं रुकेंगे।
मानव अधिकार कार्यकर्ताओं ने आज दिल्ली पुलिस भवन के आगे प्रधान मंत्री नरेंदर मोदी का पुतला दिल्ली में हुए बलात्कारों के विरोध में फूंका। उनका कहना था जब से दिल्ली में नरेंदर मोदी जी की सरकार आई हैं तब से बलात्कार के मामलों में जबरदस्त वृद्धि हुई हैं।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह का बयान लड़कों और लड़कियों दोनों से गलती हो जाती हैं। माँ-बाप को अपनी बच्चियों का ध्यान रखना चाहिए।
उत्तर प्रदेश के दूसरे मंत्री आजम खान का बयान की वह बढ़ते बलात्कार के लिए संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी लिखेंगे।
पृष्ठ 3
कुछ संगठनों ने बढ़ते बलात्कार का कारण बढ़ती फिल्मों, अश्लील साइट्स आदि के माध्यम से बढ़ती अश्लीलता बताया तो कुछ आधुनिक बुद्धिजीवी जिसमें अश्लील उपन्यास लिखकर पेट भरने वाली लेखिका, अर्धनंग और अश्लील फिल्में बनाकर पेट भरने वाले फ़िल्म निर्देशक, अपना जिस्म दिखाकर पेट भरने वाली अभिनेत्रियां मीडिया में आकर बयानबाजी करने लगे की खुले विचार हिन्दू समाज का अभिन्न अंग है।
हिन्दू धर्म कामसूत्र और खजुराओ की मूर्तियों का प्रचारक हैं।
हिन्दुत्ववादी लोग नारी को कपड़ों में कैद करना चाहते हैं।
अश्लील साइट्स देखना सभी की नजदीकी स्वतंत्रता हैं।
लिव-इन-रिलेशन में रहना, समलैंगिक होना, विवाह पूर्व या पश्चात अनेकों से सम्बन्ध होना आधुनिक विचारों का प्राय: हैं।
शर्लिन चोपड़ा और पूनम पाण्डेय ने कपड़ों के स्थानों पर अजग़र लपेट का अपना प्रतीरोध प्रदर्शित किया।
महेश भट्ट ने सन्नी लियॉन को उसकी बेदाग छवि, नैतिकता, समाज को देन के लिए भारत रत्न की मांग कर डाली।
पृष्ठ 4
फुल पेज पर विज्ञापन ही विज्ञापन
पहला सन्नी लेओनी के कंडोम का विज्ञापन
दूसरा DeoSpray में एक अर्ध नग्न मॉडल के चारों और deo लगाने पर लड़कियां मक्खियों के समान भिन्नभिना रही हैं।
तीसरा एक लड़की ब्राण्डेड जीन्स पहन कर अपनी figure दिखा रही हैं।
चौथा एक पुरुष अंडरवेअर पहन कर अपनी मर्दानगी से महिलाओं को आकर्षित कर रहा हैं।
अगले दिन, अगले सप्ताह , अगले साल भर Rape Times अखबार में यही ख़बरें अपने नाम बदलकर फिर से छपती रही। नतीजा वहीं का वहीं । भारत की मासूम लड़कियां ऐसे ही पीड़ित होती रहेगी। हर रोज अनेक लड़कियां “निर्भया” के समान अत्याचार का सामना करती रहेगी। नेता अपनी राजनैतिक रोटियां सकते रहेंगे। जिनका धंधा अश्लीलता परोस कर चलता है। वो कभी मंद नहीं होगा। व्यापारी कम्पनियां NGO धंधे वालो के साथ मिलकर अभिव्यक्ति और नीज स्वतंत्रता के नाम पर अपने उत्पाद बेचकर भारी मुनाफा कमाने के लिए युवाओं की सोच को प्रदूषित करती रहेगी। हमारी सरकार अश्लीलता को रोकने का जैसे ही कोई उपाय करेगी। सेक्युलर गैंग वाले उसकी इतनी आलोचना करेंगे की वह वोट के भय के चलते अपने पांव पीछे खींच लेगी।
अंत में —
मेरे देश की बेटी यूँ ही पिसती रहेगी !
मेरे देश की बेटी यूँ ही मरती रहेगी !
(समाज में नारी जाति को देवी कहा गया हैं। उनका सम्मान करना सभी का दायित्व हैं। आईये इस अश्लीलता रूपी दानव का देवी हाथों नाश कर एक आदर्श समाज का निर्माण करे।इस लेख को हर अश्लीलता के विरुद्ध समर्थन करने वाला मित्र शेयर अवश्य करे)

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