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क्या आप अंधविश्वासों का पालन करते हैं, पर क्यों?

Mar 30 • Arya Samaj • 839 Views • No Comments

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क्या ऐसा हो सकता है कि आप खुद को अंधविश्वासी न मानते हुए भी अन्धविश्वासी हो. जैसे कुछ विचित्र अनुष्ठानों के सामने आप सिर झुकाते हो, बिल्ली को देखकर रास्ता बदल देते हो, मंगलवार को नाख़ून या बाल कटाने से डरते हो, कोई छींक दे और आप कुछ पल को रुक जाये, कपड़े या नग नगीने के टुकड़े को “भाग्यशाली” समझ पहनते हैं, या फिर उन चीजों का पालन करें जो समझ से परे है बस इस विश्वास के साथ कि किसी न किसी तरह यह चीजें आप के अच्छे के लिए काम करती हैं?

पिछले दिनों मैं कई ऐसे लोगों से मिला जो कहते है कि हम वैसे तो कर्म में विश्वास करते हैं लेकिन मेरी एक गुलाबी कलर की शर्ट है, जब भी मैं उसे पहनता हूँ मेरे सारे काम ठीक होते है. दुसरे एक ने बताया कि वैसे में अन्धविश्वास में यकीन नहीं करता लेकिन मेरे पर्स में एक सिक्का है जो मेरे लिए शुभ है और मेरी घड़ी मेरे लिए बहुत लकी है. किसी ने गाड़ी का नम्बर शुभ बताया तो किसी के घर के बाहर काली हांड़ी लटकी मिली. एक दो लोग ऐसे भी मिले जो किसी भी धारणा में विश्वास नहीं करते थे यहाँ तक भी जब मैंने उनके सामने ईश्वर को ऊपर वाला कहा तो उन्होंने कहा क्या ऊपर वाला? ईश्वर ऊपर नीचे नहीं वो तो सर्वव्यापक है.

कमीज का रंग गुलाबी होना या घड़ी का भाग्यवान होना ये बात जीवन में तर्क संगत नहीं बैठती. हाँ ये है कई बार कुछ कपड़ें या सामान ऐसे होते है जो हमारे अन्दर आत्मविश्वास पैदा करते है. लेकिन जब आत्मविश्वास की जगह अंधविश्वास पैदा हो जाये तो समझे आप गलत जा रहे है. आमतौर पर एक कपटपूर्ण शब्द है अन्धविश्वास जैसा कि सामाजिक अध्ययन में बार-बार देखा जाता है कुछ लोग ईश्वर को अलौकिक शक्ति मानने के साथ ही कई बार एक सूक्ष्म और बेहोश धारणा में विश्वास भी करते से दिख जाते है. हानि या खतरे से बचने के बीच संबंध बनाए जाते है अर्थात इसे एक किस्म का सौदा भी कहा जाये तो गलत नहीं होगा. क्योंकि ये ईश्वर और लोगों कामना के बीच होता है. ये सौदा या तो कोई कथित बाबा या फिर कोई ज्योतिष बनवाते है, असल खतरे की काल्पनिक अवस्था को जो लोग मोल लेते है तो मोल चुकाते भी है.

अनहोनी या दुर्घटना तथा अन्य किसी बुरे की आशंका को अन्धविश्वास का जन्मदाता कहा जाता है कुछ ऐसे जैसे ब्रह्मांड में आपके खिलाफ कोई साजिश रची जा रही हो और उस साजिश को असफल करने के लिए छुटमुठ प्रयास आप कर रहे हो! जब मन में दुर्घटना आदि का कोई विचार मन में कूद जाता है तो इसके पीछे खड़ी सावधानी के बजाय इन्सान के मन में पहले अन्धविश्वास कूद जाता है. इसके बाद अधिकांश लोग खतरे से बचने के लिए उसी तर्क से सहमत होते हैं जो उन्हें सरल लगता है.

अगर आप मौत, दुःख, हानि आदि समस्त कष्टों को चकमा देने के प्रयास में कोई धार्मिक क्रिया कर रहे है और यदि आपका जवाब हां से है तो यह क्रिया ईश्वर के अस्तित्व को नकार रही है. क्योंकि कोई घटना, दुःख, सुख होनी-अनहोनी के साथ तर्कसंगत विश्वास बना लिया गया हैं कि परिस्थिति कुछ धार्मिक अनुष्ठानों जैसे प्रसाद चढाने, भंडारा करने, कीर्तन या जागरण आदि से अपना रास्ता बदल देती है और कुछ लोकिक घटनाएँ अपने पक्ष में हो जाती है और बुरी घटनाएँ विपरीत हो जाती है.

आज कई संस्कृतियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके अंधविश्वास को उन मान्यताओं को नामित किया जाता है जो अज्ञानता और अज्ञान के डर से उत्पन्न हुई थी. कई अंधविश्वास प्रथाओं प्राकृतिक घटनाओं के झूठी व्याख्याओं के कारण हैं. इसमें सबसे पहली बात ये है कि अन्धविश्वास और धर्म का दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं है लेकिन इसे बड़ी सफाई से धर्म से जोड़ दिया गया. इस कारण आज यदि कोई अन्धविश्वास को नकारेगा तो उसे धर्म के विरुद्ध माना जाता है. तो इसे सांस्कृतिक परंपरा जोड़ दिया गया बीमारी से निपटने के लिए या अच्छे को लाने, भविष्य की भविष्यवाणी, कुछ विशिष्ट लोक परंपराएं, जैसे बुरी नज़र और ताबीज की प्रभावकारिता आदि

लोग अंधविश्वासी क्यों बनते हैं? दरअसल एक तो लोग जिनसे प्रभावित होते है उनका अनुकरण करते है. यदि वह अंधविश्वासी हैं तो लोग भी अंधविश्वासी हो जाते है. दूसरा परिवार के बड़े बुजुर्ग, सामाजिक परम्परा, कल्पनाशील कहानियां, ये सब मिलकर इन्सान को अन्धविश्वासी बना डालती है.

कारण धर्म और अंधविश्वास बीच सीमा रेखा बहुत पतली है और अक्सर यह पाया गया है कि यह एक-दूसरे से जुड़े हुए है, हालाँकि यह भगवान पर विश्वास की कमी का उल्लेख करता है. इससे लोगों को भाग्य को दोष देने से अपनी गलतियों को छिपाने में सहायता मिलती है,  उनके अनुसार भगवान को छोड़कर कोई भी नियंत्रण नहीं कर सकता. तो इन्सान कुछ पैसे, कुछ भोग आदि का जुगाड़ करता है. शायद ये रिश्वत हो भाग्य को अपने नियन्त्रण में करने के लिए? यदि सब अकेले ना कर सके तो सामाजिक रूप से नही तो किसी ज्योतिष को पैसे देकर यह क्रिया करा सकते है. तनाव और गरीबी भी अंधविश्वास की हमराही बनती हैं. कहते हैं लोग उन सभी दुर्भाग्यपूर्ण कारणों के कारणों को खोजने के लिए प्रयास करते है. जिन घटनाओं की व्याख्या को भाग्य कहा जाता है. आधुनिकता और आत्मज्ञान के बाद, अंधविश्वासी विश्वास अभी भी हमारे समाजों में बना हुआ है. यदि आप मुझसे असहमत हैं तो आप अपने बारे में जांचें अपना मूल्यांकन करें कि क्या आप अन्धविश्वासी है?….राजीव चौधरी

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