MDH-Masala

दानवीर कर्मवीर और धर्मवीर महाशय धर्मपाल जी को पद्मभूषण सम्मान

Jan 30 • Arya Samaj • 232 Views • No Comments

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...

समस्त आर्य समाज से जुड़े लोगों के लिए यह एक गर्व, गौरव और प्रेरणा देने वाली खबर है कि महाशय धर्मपाल जी को भारत सरकार द्वारा नामित किये जाने पर उन्हें गणतंत्र दिवस के मौके पर पद्मभूषण से सम्मानित किया गया है। ट्रेड एवं इंडस्ट्री में काम के लिए उन्हें ये पुरस्कार मिला है। शून्य से चले महाशय आज शिखर तक कैसे पहुंचे ये कोई रहस्य नहीं हैं बल्कि उनकी मेहनत, कर्तव्यनिष्ठा और लग्न का परिणाम है कि एक साधारण सा तांगे वाला आज भारत में व्यापार के क्षेत्र में पद्मभूषण बन गया।

लेकिन उनकी इस प्रसिद्धि की केवल यही एक वजह नहीं है और न ही महाशय जी कार्यों और प्रसिद्धी का उल्लेख कागज के कुछ टुकड़ों पर किया जा सकता है। क्योंकि महाशय जी ने सार्वजनिक जीवन के दायित्व का पालन तो बखूबी किया ही साथ ही समाज में गरीब, बेसहारा लोगों के अनाथालय, स्कूल, अस्पताल जैसे न जाने कितने संस्थानों का निर्माण कराकर समाज को समर्पित किये, जिनकी सूची काफी लम्बी है। इन अनुकरणीय कार्यों के बाद भी महाशय जी ख्याति यही समाप्त नहीं होती यह टीवी विज्ञापन में आने वाले दुनिया के सबसे अधिक उम्र के स्टार के रूप में भी जाने जाते हैं।

उनकी लंबी उम्र का राज उनका शुद्ध शाकाहारी भोजन और रोजाना किये जाने वाले व्यायाम है। पार्क में सैर करने के लिए वह रोज सुबह 4 बजे उठते हैं, वह योगा भी करते हैं वह शाम को भी सैर करने जाते हैं और रात को खाने के बाद भी। बावजूद इसके वह हर रोज कम से कम एक फैक्ट्री में जाते हैं। चाहे फिर वह दिल्ली की फैक्ट्री हो या फरीदाबाद और गुरुग्राम की।

इस सबके बावजूद महाशय जी एक सबसे बड़ी ख्याति यह है कि वह महर्षि दयानन्द सरस्वती जी द्वारा स्थापित और समाज को श्रेष्ठ मार्ग दिखाने वाले संगठन आर्य समाज के ध्वज को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। हम आर्यजनों के लिए यह गौरव का विषय इसलिए भी है कि भारत जैसे धार्मिक देश में कथित छत्तीस करोड़ देवी देवताओं उनके नाम पर कार्य करने वाले हजारों संगठनों और लाखों स्वयंभू बाबाओं से न जुड़कर महाशय जी ने आर्य समाज की आवाज को न केवल बुलंद किया बल्कि आर्य समाज के कार्यों को आगे बढ़ाने में अपने तन, मन और धन से सहयोग दिया। यही कारण है कि आज महाशय जी के आशीर्वाद से देश के पूर्वोत्तर भाग से लेकर मध्य भारत और दक्षिण भारत में वेद रिसर्च सेंटर से लेकर, गरीब आदिवासी बच्चों के लिए स्वामी दयानन्द सरस्वती जी द्वारा दिखाए मार्ग को प्रेरणादायक मानते हुए स्कूल कालिजो की स्थापना की। यदि पूर्वोत्तर भारत में आज वेद के मन्त्र गूंज रहे है तो इसका एक बड़ा श्रेय महाशय जी ही को जाता हैं।

हाल ही अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन का सफलतापूर्वक सम्पन्न होना इसके पश्चात आर्य समाज को वैचारिक दुनिया में संवाद के रूप में आर्य मीडिया सेंटर के तौर पर एक हथियार देना महाशय जी की दानवीर ख्याति को दर्शाने के लिए काफी हैं। आर्य जगत से जुड़ें लोगों से निरंतर संवाद आर्य समाज की गतिविधियों की निंरतर जानकारी लेना हम सब लोगों को प्रेरित करना एवं स्वयं 96 वर्ष की अवस्था में एक युवा की भांति साथ चलना ही महाशय जी को दानवीर, कर्मवीर और धर्मवीर बना जाता हैं। महाशय जी आर्य रत्न तो थे ही अब उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया जाना हम सब आर्यों को एक नई दिशा, उत्साह और प्रेरणा देगा। हम भारत सरकार का ह्रदय से आभार व्यक्त करते है साथ ही महाशय जी कर्तव्यनिष्ठा को भी नमन करते हैं। अंत में एक शायर की कुछ पंक्तियाँ याद आ गयी कि “खुश रहे तुम्हे देखने वाले वरना किसने खुदा को देखा है”

लेख-विनय आर्य (महामंत्री )

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)

« »

Wordpress themes