dhakk

देश का भयावह चित्र….

Jan 25 • Samaj and the Society • 238 Views • No Comments

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...

आज हमारे अभागे देश के सुपठित समझे जाने वाले लेखकों, इतिहासकारों, फिल्मकारों एवं कथित सामाजिक धुरन्धरों का आत्मा अपने स्वाभिमान तथा राष्ट्रिय गौरव को भूलकर विदेशी बौद्धिक दासता को गले लगाकर उन्मत्त होकर नग्न नृत्य कर रहा है। लगभग सात सौ वर्ष की इस्लामी दासता एवं दो सौ वर्ष की अंग्रेजों की दासता भोगने के पश्चात् कथित बुद्धिजीवियों का मन, मस्तिष्क व आत्मा अभी उस दासता को त्यागने को तैयार नहीं है। सम्भवतः उनकी दृष्टि में वीर शहीदों व अन्य क्रान्तिकारियों ने इस देश को स्वतंत्र कराने हेतु अपने प्राणों अथवा सांसारिक सुखों की आहुति देकर भूल की। ये बुद्धिजीवी आज भी अपने को दास समझ रहे हैं। क्या ही अच्छा हो, कि ये बुद्धिजीवी अपने को जिस संस्कृति, सभ्यता के दास बनने में गौरव अनुभव करते हैं, वे उसी देश में चले जाएं, जहाँ से इस प्रकार की कुसभ्यता का विस्तार हुआ है। आज JNU में भगवती उमा (पार्वती) व भगवान् मनु को गालियां दी जाती हैं, विश्वप्रसिद्ध देशाभिमानी वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के DNA पर प्रश्न खड़े किये जाते हैं, पतिव्रताओं में अनुपम स्थान रखने वाली महारानी पद्मिनी एवं कभी-2 तो भगवती देवी सीता जी के चरित्र पर प्रश्न खड़े किए जाते हैं। वस्तुतः जिस कुशिक्षा व कुसभ्यता में वस्त्रों की भांति पति-पत्नी के सम्बन्ध बदले जाते हैं अर्थात् जिनमें पशु से बदतर उन्मुक्त यौनाचार निजता के नाम पर होना सामान्य बात है, उन्हें इन देवियों के चरित्र का मूल्य कैसे पता चलेगा।

आज दुर्भाग्य से इस प्रकार की राष्ट्रविरोधी स्वच्छन्दता का विरोध करने वाले भी विशेष बुद्धिमान् व संगठित कहाँ है? अंग्रेजों ने हमारे देश के राजाओं व जनता में फूट का बीज बोकर जो शासन किया था, वह हमारे देश के अंग्रेजों के मानसिक दास राजनेताओं ने भी अच्छी प्रकार सीख लिया। जाति-मजहब के नाम पर देश देशवासियों को ऐसा बांटा कि अब यह देश शायद कभी एक नहीं होगा। जाति-सम्प्रदाय के नाम पर पहले जातिगत छूआछूत-भेदभाव के नाम पर देश बंटा था, तो अब उसके ठीक विपरीत जातिगत आरक्षण आदि के नाम पर यह हिन्दू समाज ऐसा बंटा है कि उसने अपने पूर्वजों को भी जाति के नाम पर बांट लिया है।

 उधर मध्यकालीन कुछ वेदविद्या से विहीन राजाओं की भूलों के कारण सम्पूर्ण राजतंत्र व राजाओं को ऐसा बदनाम किया गया कि आज कुछ समूहों के अतिरिक्त अन्य समाज इन देवियों व राजाओं के सम्मान को न तो अपना सम्मान मानता है और न देश का ही सम्मान मानता है। हमें स्मरण रखना चाहिए कि यदि किसी देश को तोड़ना हो, तो देश के नागरिकों के मन में देश के शासकों (राजाओं अथवा राजनेताओं) के विरुद्ध विष भर दिया जाए, तो वह देश कभी अखण्ड व स्वतंत्र नहीं रह सकता। मैकाले द्वारा प्रदत्त हमारे देश की शिक्षा ने यही किया। इससे हमारे देशवासी राजाओं को अपना पूर्व शासक न मानकर अत्याचारी के रूप में देखते हैं, इसी कारण उनके मन में इन राजा व रानियों के प्रति कुछ भी संवेदना नहीं है। एक वर्ग विशेष व कुछ छोटे-2 हिन्दू संगठनों के अतिरिक्त कोई संगठित विरोध इस स्वच्छन्दता का नहीं हो रहा है। कुछ लोभी, विलासी राजाओं एवं कुछ कथित स्वार्थी वेदविद्या विहीन ब्राह्मणों ने पहले देश में विदेशी आक्रान्ताओं का साथ दिया, तो आज ये मजहब और जातियों के स्वार्थ पुनः देश को उसी इतिहास की ओर ले जा रहे हैं। आज देशवासियों को अपने पूर्वजों में कोई भी गुण नजर नहीं आता, ऐसा इस अभागे भारत देश में ही सम्भव है।

यह बात भी उल्लेखनीय है कि कला के इन स्वच्छन्द उपासकों में यह साहस कभी नहीं होता कि वे गैर हिन्दू सम्प्रदायों के आदर्शों पर प्रहार करें। वे जानते हैं कि गैर हिन्दू संगठित होकर इस देश में क्या-2 कर सकते हैं। इधर उजड़ता, जलता, खण्ड-2 होता, अपने-2 निजी स्वार्थों में लिप्त लोभी, अभागा हिन्दू समाज उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। फिर यह अभागा हिन्दू समाज स्वयं भी तो महापुरुषों का रूप धर-2 कर अपने महापुरुषों की मिथ्या लीलाएं करता है। भक्ति के नाम पर रासलीला, कहीं कोई लीला, क्या हिन्दू महापुरुषों का गौरव बढ़ाती है? जब इस हिन्दू समाज में स्वयं यह बुद्धि नहीं कि वह महापुरुषों की लीलाएं न करे, तब ब्रह्मचर्यादि मर्यादाओं से सर्वथा दूर स्वेच्छाचारी कला प्रेमी क्यों न धन के व्यामोह में हिन्दुओं के महापुरुषों की कुत्सित लीलाएं नहीं करेंगे।

मेरे देशवासियो! असत्य व अश्लीलता का विरोध करने के लिए स्वयं सत्य व संयमित जीवन जीना सीखना होगा। उसके पश्चात् संगठित होकर पूर्ण शान्तिपूर्वक ढंग से हर पापी प्रवृत्ति का विरोध करना होगा। भारतीय कानून का पूर्ण परिपालन करते हुए ही स्वच्छन्दी काम लिप्सुओं का शान्तिपूर्ण विरोध करना होगा अन्यथा एक-2 करके हमारे सभी महापुरुषों व देवियों को ये कथित बुद्धिजीवी वस्तुतः मूर्ख लोग इस देश से मिटा देंगे।

आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)

« »

Wordpress themes