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पाकिस्तान जिंदाबाद की स्क्रिप्ट अब फटीचर हो गयी

एक ज़माना था जब कोई भी मुंह उठाता और दिल्ली पर आक्रमण कर देता था। उसी तरह आज भारत में कोई भी मुंह उठाकर पाकिस्तान जिंदाबाद और भारत के टुकड़े करने की बात कह कर चल देता है। पिछले दिनों सरजील इमाम भारत को पूर्वोत्तर से काटने की बात कर रहा है।

अभी हाल ही में कर्नाटक के हुबली में तीन कश्मीरी स्टूडेंट्स ने पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाज़ी की है। हालांकि विरोध बढ़ता देख पुलिस ने तीनों आरोपी कश्मीरी स्टूडेंट्स को हिरासत में ले लिया हैं। तीनों को कोर्ट ने 2 मार्च तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

पाकिस्तान के प्रति क्यों उमड़ता है लोगों का प्रेम?

फोटो साभार- सोशल मीडिया
फोटो साभार- सोशल मीडिया

पता नहीं पाकिस्तान में ऐसा क्या है, जो उसके प्रति इन लोगों का इतना प्रेम उमड़ पड़ता है। जबकि मैंने तो जब से वहां रोटी के लाले और महंगाई की न्यूज़ देखी है, तब से गूगल मैप में भी पाकिस्तान को देखना पसंद नहीं करता हूं। इस डर से कि क्या पता कोई आटा मांग ले या दाल!

अच्छा एक बात बड़ी खास इस भारत में देखने को मिलती है। यहां लोग सरकार की नीतियों खिलाफ होते हैं, तो मुंह उठाकर पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाने लगते हैं, वरना इस दुनिया में ढाई सौ से अधिक देश हैं उनकी जय भी बोली जा सकती है!

मसलन, महंगाई ज़्यादा है तो कनाडा ज़िंदाबाद, सरकार दमन कर रही है अमेरिका ज़िंदाबाद, कभी फ्रांस तो किसी मौके पर रूस और ऑस्ट्रेलिया की जय भी बोली जा सकती है।

लेकिन हर जगह पाकिस्तान और सिर्फ पाकिस्तान! यार कम-से-कम जय तो ढंग के देश की बोलना सीख लो। देश की बेइज्ज़ती ही करने का शौक है तो सोमालिया जिंदाबाद बोल दो!

देश को तोड़ने की बात करने वाले पाकिस्तान के दुलाड़े बन जाते हैं

शरजील इमाम
शरजील इमाम। फोटो साभार- सोशल मीडिया

खैर, इसके पीछे का कारण यह है कि जो इस देश के खिलाफ षड्यंत्र रचता है, इस देश को तोड़ने की बात करता है, क्या वह वाकई में पाकिस्तान का दुलारा बन जाता है? उदाहरण देखें तो मुम्बई को दहलाने और सैकड़ों मासूमों का हत्यारा दाउद इब्राहिम अब तक पाकिस्तान का लाडला बना बैठा है।

इसके अलावा भारत में अनेकों आतंकी हमलों का ज़िम्मेदार जैश सरगना अजहर मसूद, हिजबुल का चीफ हो या लश्कर का मुखिया, सभी पाकिस्तान की आंख के तारे हैं। तो हो सकता है यहां भी ऐसे नारे लगाकर ये लोग पाकिस्तान को दिखाना चाहते हों कि देखो भाई ढीले-ढाले कानून का फायदा ये होता है कि तुम उस पार जो कह रहे हो, हम भी इस पार यही कह रहे है।

दूसरा, कुछ समय पहले तक भले ही राजद्रोह को पाप समझा जाता हो लेकिन आज यह एक फैशन बन गया है, क्योंकि किसी को भी लाइम लाइट में आना हो तो बस देश के खिलाफ बोल दे। ऐसा करने से शाम तक वह ब्रांड बन जाता है, टीवी चैनल्स से लेकर सोशल मीडिया पर उसके पक्ष-विपक्ष में चर्चाएं होने लगती हैं।

पाकिस्तान ज़िंदाबाद ही क्यों?

फोटो साभार- सोशल मीडिया
फोटो साभार- सोशल मीडिया

ज़रा कल्पना करिए कि अगर यह काम ऐसे समय कर दिया जाए, जब दोनों पड़ोसी देश एक-दूसरे को गाली-गलौच कर मुंह से आग निकाल रहे हों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हों और एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ मची हो।

उस समय यदि कोई युगांडा या सोमालिया जिंदाबाद बोल दे, भला कौन सुनेग? अब ऐसे में अगर हीरो बनना हो तो पाकिस्तान ज़िंदाबाद बोल दो बाकी का काम मीडिया और सोशल मीडिया पूरा कर देगा। अगले चुनाव में कोई ना कोई पार्टी टिकट दे ही देगी।

अब कुछ लोग सोचें कि जब किसी अन्य देश की जय बोलने से हमें कोई ऐतराज नहीं है, फिर पाकिस्तान से ऐतराज क्यों? इसका कारण शायद सभी जानते होंगे कि पाकिस्तान जय बोलने के पीछे सबसे बड़े कारणों में से एक है उनका भारत की राजनीती में हस्तक्षेप।

दूसरा, भारत की आत्मा पर यदि किसी ने सबसे ज़्यादा घाव दिए हैं, तो वह पाकिस्तान है। हमारे हज़ारों सैनिकों ने पाकिस्तान से लड़कर अपना रक्त बहाया है, हज़ारों विधवा आज देश में पाकिस्तान की वजह से हैं और ना जाने कितने मासूम बच्चों के सर से बाप का साया इसी पाकिस्तान की वजह से उजड़ा है।

हर रोज़, हर महीने हमारे देश के जवान सीमा पर शहीद होते हैं। कम-से-कम उनके बलिदान की कद्र तो करनी चाहिए, क्योंकि वे इस देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करते हैं।

किन्तु इसके बावजूद कभी जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, कभी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, कभी जाधवपुर यूनिवर्सिटी या एमनेस्टी इंटरनैशनल के सेमिनार में पाकिस्तान की जय बोलकर यह साबित किया जाता है कि हम नहीं सुधरेंगे, चाहे पाकिस्तान जिंदाबाद की स्क्रिप्ट कितनी भी फटीचर क्यों ना हो जाए।

सच बताऊं तो जब कोई पाकिस्तान जिंदाबाद या इस देश को तोड़ने का नारा लगाता है, तो दिल डूबने लगता है कि हे भगवान क्या अब देश को एक और नया नेता मिलने वाला है? लेकिन इन सबके बावजूद भी सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर के नेतृत्व के मध्य यह साबित करने की होड़ लगी हुई है कि कौन कितना बड़ा नाटकबाज़ है और कौन कितना बड़ा देशभक्त! बाकी तो सोशल मीडिया पर मुंह आड़ा तिरछा करके सेल्फी डालने में व्यस्त है।

लेख-राजीव चौधरी

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