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पीएम-केयर्स फंड घोटाला… क्या है पूरा फंडा

कांग्रेस के बड़े नेता शशि थरूर और कांग्रेस के एक इतिहासकार रामचंद्र गुहा दोनों ने पीएम केयर्स फंड में मिले दान की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए है.. इसके बाद एक वकील एम.एल शर्मा ने पीएम केयर्स फंड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दाखिल की है..कांग्रेस की माने तो ये एक बड़ा घोटाला है अगर ये सामने नहीं आया तो देश रसातल में चला जायेगा. इनका कहना है जब प्रधानमंत्री राहत कोष पहले से ही मौजूद था तो पीएम केयर्स फंड की क्या जरूरत आन पड़ी थी..

असल में 28 मार्च 2020 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट के जरिये अपील करके कहा था कि कोरोना जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपात राहत कोष पीएम-केयर्स फंड की स्थापना की जा रही है और लोग उसमें दान करें. इस कोष का इस्तेमाल भविष्य में आनेवाली दिक्कत की घड़ियों में भी किया जाएगा. ट्वीट में फंड से जुड़ी हुई कई सूचनाओं का लिंक भी मौजूद था.

प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ी वेबसाइट पर फंड से संबंधित जानकारी में कहा गया कि प्रधानमंत्री पीएम-केयर ट्रस्ट के अध्यक्ष होंगे और इसके सदस्यों में विदेश मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं.

इसके बाद अभी तक इस फंड में पत्रकार रह चुके आरटीआई कार्यकर्ता साकेत गोखले ने लोगों की घोषणाओं से पीएमकेयर्स में होने वाले चंदे की गिनती की.. मतलब गोखले ने सूचनाओं की जमा किया जितने लोगों ने जितना पैसा देने का दावा किया, उसको जोड़ जाड़कर हिसाब लगाया. और पता लगा कि अब तक पीएम केयर्स में करीब 7 हजार 800 करोड़ रुपयों से ज्यादा पैसे जमा किए जा चुके हैं. हालाँकि अभी तक इसमें उन पैसों का हिसाब जोड़ा ही नहीं गया है, जो लोगों ने बिना जाहिर किए या बिना किसी को बताए फंड में पैसा जमा किया हैं.

अब जहाँ एक ओर कांग्रेस पार्टी की ओर से लगातार इसे एक बड़ा घोटाला बताया जा रहा है, सोशल मीडिया के कुछ महारथियों की माने तो यह दुनिया का अब तक सबसे बड़ा घोटाला है..कुछ लोग ये भी कह रहे है कि उधोग जगत से लेकर नेताओं अभिनेताओं और आम आदमी का पैसा गटका जा रहा है और भक्त खामोस है…

भक्त तो आप समझते होंगे असल में भक्त उन्हें कहा जा रहा है जिन्हें अपने देश के प्रधानमंत्री पर पूरा भरोसा है और इनका कहना है कि जब 2014 अब तक कोई घोटाला नहीं हुआ तो अब घोटाले की बात कहाँ से आई..

पर किसी के विश्वास और अंधविश्वास का नहीं सवाल है सवाल ये है क्या सच में पीएम् केयर में घोटाला हुआ है और मोदी जी सारा पैसा खा गये..ऐसा हम नही लोग कह रहे है विपक्ष के कुछ नेता सत्ता पक्ष पर आरोप लगा रहे है..यही नहीं इसमें विदेशी फंडिंग का एक बड़ा खेल भी बताया जा रहा है

असल में कुछ पोर्टल लिख रहे है कि जिस समय पीएम केयर्स की घोषणा हुई, उस समय प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर इसके खाते का पूरा ब्यौरा दे दिया गया. ताकि लोग दान कर सकें. इसमें खाता नम्बर, बैंक खाते का आई.एफ.एस.सी कोड, और स्विफ्ट कोड दिया गया. मतलब कोई भारत के बाहर से इस खाते में पैसा डालना चाहे, उसके लिए स्विफ्ट कोड का रास्ता भी खोला गया था.

लेकिन बाद वेबसाइट पर मौजूद पीएम् केयर के डोनेशन विंडो में से स्विफ्ट कोड हटा दिया गया. और एक संदेश डाल दिया गया. कि विदेशों से चंदे के लेनदेन के लिए हम 2-3 दिनों के भीतर खाते का डिटेल देंगे. बस इसी एक वजह कुछ वो लोग इसे घोटाला समझ बैठे जिनकी कुंडली में ए से लेकर जेड तक घोटाले का योग जुड़ा हुआ है..

अब अगर इसमें असली बात करें तो जनवरी, 1948 में पाकिस्तान से विस्थापित लोगों की मदद करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी की अपील पर जनता के अंशदान से प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की स्थापना की गई थी. उस समय पाकिस्तान से आये कितने लोगों तक इसमें से जमा धन राशि पहुंची ये अलग विषय है लेकिन इसके बाद राहत कोष में जमा धनराशी युद्ध बाढ़ भूकंप आदि जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मारे गए लोगों के परिजनों तथा बड़ी दुर्घटनाओं एवं दंगों के पीड़ितों को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए किया जाने लगा..

चूँकि यह कोष केवल जनता के अंशदान से बना है और इसे कोई भी बजटीय सहायता नहीं मिलती है. फंड में पूरी तरह से सार्वजनिक योगदान होता है और इसे कोई बजटीय समर्थन नहीं मिलता है. फंड के कॉर्पस को विभिन्न रूपों में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और अन्य एजेंसियों के साथ निवेश किया जाता है..

ये तो था प्रधानमंत्री राहत कोष अब कांग्रेस के पेट में दर्द का कारण समझे तो इसमें कई चीजें निकलकर सामने आ रही है खास बात यह भी है कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष का गठन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था हालांकि इसके प्रबंध समिति ने हमेशा कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष को शामिल किया गया है.

हाँ जब नेहरु जी ने राहत कोष बनाया तो कौन-कौन से लोग इसके प्रबंध समिति में शामिल थे. इसमें कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष.. प्रधान मंत्री, उप प्रधानमंत्री, टाटा ट्रस्टीज का एक प्रतिनिधि. फिक्की द्वारा चुने जाने वाले उद्योग और वाणिज्य का एक प्रतिनिधि

यानि कुछ भी हो जाये सत्ता में कांग्रेस रहे ना रहे, सरकार भाजपा की हो या कांग्रेस की तीसरा मोर्चा हो या चौथा पांचवा मोर्चा, सरकार सपा की हो या बसपा की कांग्रेस अध्यक्ष इसमें शामिल जरुर रहेंगे..शायद तभी इनके पेट का दर्द बाहर छलक रहा है.. कमाल की बात देखिये कि प्रधानमंत्री राहत कोष का गठन भारत की संसद द्वारा नहीं किया गया था बस नेहरु जी ने ही इसे बनाया था..

हालांकि बाद में समय-समय पर इसमें नए सदस्यों को जोड़ा गया है साल 1985 में एक ऐसा समय आया जब देश में राजीव गाँधी प्रधानमंत्री थे, तब इस फंड प्रबंधन की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री को सौंप दी गयी और प्रधानमंत्री को यह भी अधिकार दिया गया कि वह जिसे चाहे उसे फंड का सचिव बना सकते हैं जिस पर फंड के बैंक खातों को संचालित करने का अधिकार होगा…

दर्द का किस्सा तो समझ गये होंगे अब अगर घोटाले को समझे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए सार्वजनिक योगदान के लिए पीएम केयर फंड का गठन किया इसके तहत मिलने वाले दान को कोरोना वायरस से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. और इसमें कोंग्रेस अध्यक्ष का पत्ता साफ कर दिया.. अब इस फंड के अन्य सदस्यों में रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री के अलावा विज्ञान, स्वास्थ्य, कानून और सार्वजनिक क्षेत्रों में अच्छे काम करने वाले लोगों को भी इसके सदस्य के रूप में नियुक्ति की गई है..

अब सवाल ये भी है कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष होने के बावजूद भी पीएम के अंत की शुरुआत क्यों की गई? एक पत्रिका ने दावा किया है कि पीएम केयर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष की तुलना में अधिक लोकतांत्रिक अधिक पारदर्शी है, इसमें सलाहकार बोर्ड की स्थापना का भी प्रावधान है जिसमें चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षाविदों, अर्थशास्त्रियों और वकीलों को रखा जा सकता है.. लेकिन राजनीति वही आकर रुक जा रही कि कांग्रेस जहां इसे पारदर्शी नहीं बता रही है वहीं भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इससे इसलिए नाखुश है क्योंकि इसमें कांग्रेस अध्यक्ष के लिए कोई जगह नहीं है..बस यही घोटाला हुआ है..

राजीव चौधरी

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