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भारत के आदिवासी क्षेत्रों में आर्य समाज

May 16 • Arya Samaj • 1390 Views • No Comments

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इस चर्चा में आगे बढ़ने से पहले एक बात याद आ गयी कि जब पिछले वर्ष 2016 में नेपाल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन के मंच से उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्मंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने वहां उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा था कि आप सब आर्य समाज से जुड़ें हैं आपके लिए यह गौरव की बात होनी चाहिए। आज मुझे इस बात को दोबारा लिखते हुए उतनी ही गर्व की अनुभूति हो रही है जितनी उस दिन हजारों की संख्या में उपस्थित जनसमुदाय हो हुई थी। गर्व की अनुभूति इस वजह से हो रही है कि आर्य समाज जिस गति से राजनैतिक और मीडिया के शोर बिना अपने लक्ष्य में निरन्तर आगे बढ़कर प्रगति कर रहा है। आने वाले समय में स्वामी दयानन्द सरस्वती जी का सपना सच होता ज्यादा दूर नहीं लगता।

पिछले कुछ सालों में आर्य समाज ने ज्ञान के साथ-साथ सेवा के क्षेत्र में बिना किसी भेदभाव के अपने कदम आगे बढ़ाये और उन लोगों के मध्य पहुंचा जिन्हें 21वीं सदी में भी आदिवासी, वन्यजाति, वनवासी तथा अनुसूचित जनजाति आदि नामों से संबोधित किया जाता हैऋ लेकिन यह सब इस हिन्दू समाज का हिस्सा होने के साथ इसी भारत माता की संतान है। बस शिक्षा और संसाधनों के आभाव के कारण अभी मुख्यधारा से थोड़ा दूर है। लेकिन इस दूरी को खत्म करने के लिए आर्यसमाज अपनी पूरी लगन, निष्ठां के साथ इनके विकास के लिए कार्य कर रहा है। आर्य समाज उन विदेशी पर्यटकों या फोटोग्राफरों की तरह नहीं है जो आदिवासियों की फोटो लेकर उस गांव से निकल लिए और विश्व भर की पत्र-पत्रिकाओं में वह फोटो देकर भारत की गरीबी का मजाक बनाये या फिर धर्मांतरण मिशनरीज की तरह डेरा डालकर उन्हें  पथभ्रष्ट करने का कार्य करें। आर्य समाज का उदेश्य आदिवासियों की गरीबी या मजबूरी दिखाना नहीं है। आर्य समाज मानता है आदिवासी कमजोर नहीं ताकतवर हैं। बस इस स्वाभिमानी समाज को आधुनिक शिक्षा और मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत है।

इस कड़ी में हमने पिछले कुछ समय में तेजी लाते हुए महाशय धर्मपाल जी के व अन्य आर्य महानुभावों के सहयोग से पूर्वोत्तर भारत से लेकर मध्य और दक्षिण भारत में स्कूल और बालवाड़ी का कार्य प्रारम्भ किया। लेकिन इन जगहों पर कठिनाई यह आती थी कि उन लोगों के बीच आर्य समाज और इसके द्वारा किये जा रहे सामाजिक उन्नति के कार्यो से कैसे अवगत कराएँ तब इसके लिए पूर्व आर्य महानुभावों ने दिल्ली में सामूहिक प्रशिक्षण शिविर लगाने का कार्य किया ताकि भारत भर से आये इन लोगों के मध्य कार्य करने वाले सज्जन एक जगह एकरूपता से यज्ञ आदि का प्रशिक्षण ले सकें। इस 15 दिवसीय शिविर में संस्कार, राष्ट्रभक्ति और चरित्र निर्माण पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इस कारण आर्यसमाज की यह बालवाड़ी सामाजिक उन्नति का उत्तम साधन बन गई। आपस में मिलजुल कर रहने का प्यार का सन्देश घर-घर पहुँचने लगा। बच्चों के अभिभावक आर्यसमाज को इस प्रवृत्ति से खुश हुए और आर्यसमाज के निकट आये, परिचय बढ़ा। इसी वजह से आसाम, नागालैंड, बमानिया आदि जगहों पर वैदिक महासम्मेलन में आज हजारों की संख्या में लोग भाग ले रहे हैं।

आर्य समाज चाहता है आदिवासी नागरिक भी सामान्य भारतीयों की तरह आधुनिक जीवन शैली तथा उपलब्ध सुविधाओं का उपभोग करें। हॉं यह बात सही है कि अपने जल, जंगल-जमीन में सिमटा यह समाज शैक्षिक आर्थिक रूप से पिछड़ा होने के कारण राष्ट्र की विकास यात्रा के लाभों से वंचित है। इसी कारण आदिवासी साहित्य अक्षर से वंचित रहा, इसलिए वह अपने यथार्थ को लिखित रूप से न साहित्य में दर्ज कर पाया और न ही इतिहास में।

भारतीय संस्कृति के ज्ञान का विस्तार होते रहना चाहिए भारतीय संस्कृति व प्राचीन परम्पराओं का प्रशिक्षण देते हुए पिछले 35 वर्षों से चल रही इस सामाजिक, आध्यात्मिक उन्नति से हजारों लोगों को संस्कारित कर आर्यसमाज अपना कर्त्तव्य पालन कर रहा है। इस कार्यक्रम का विशेष महत्त्व यह है कि शिविर में ओडिशा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, आसाम, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड नागालैंड, झारखण्ड आदि प्रदेशों से शिविरार्थी आते हैं। इस शिविर के माध्यम से शिविरार्थियों को भारतीय संस्कृति की शिक्षा और स्वालम्बी बनने की प्रेरणा दी जाती है। इस शिविर के माध्यम से प्रशिक्षण लेकर आदिवासी क्षेत्रों के लोग अपने गांव के लोगों को बालवाड़ियों के माध्यम से शिक्षित करते हैं। भारतीय समाज की विभिन्नता में एकता का सबसे सुन्दर उदहारण इस शिविर में देखने को मिलता है।

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आर्य समाज अखिल भारतीय दयानन्द सेवाश्रम संघ के सानिध्य में विद्यार्थियों के संस्कार, राष्ट्र भक्ति एवं चरित्र निर्माण हेतु 14 मई से 28 मई 2017 तक 36 वां वैचारिक क्रांति शिविर आयोजित करने जा रहा है। आप सभी धर्म प्रेमियों एवं राष्ट्र प्रेमी सज्जनों से प्रार्थना है कि कृपया आप राष्ट्र निर्माण के इस निर्धारित कार्यक्रम में सहयोग करें तथा पधार कर शिविरार्थियों को अपना आशीर्वाद प्रदान करें ताकि आने वाले भारत का भविष्य उज्जवल बनें।

-विनय आर्य

 

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