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महर्षि दयानंद निर्माण दिवस

May 28 • Parv • 1027 Views • No Comments

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IMG_0784-8 8x12-- IMG_0797-3हमें अपनी आत्मा को ज्ञान से प्रकाशित करना चाहिए। वैदिक ज्ञान आत्मा के अज्ञान तथा अंधविश्वास को दूर करता है। यह बात आचार्य अग्रिमित्र शास्त्री ने रविवार 03 नवम्बर 2013 को आर्य समाज गायत्री विहार में कोटा की सभी आर्य समाजों द्वारा संयुक्त रूप से मनाये गये महर्षि दयानन्द निर्वाण दिवस और शारदीय नवसस्येष्ठी (दीपावली)पर्व के अवसर पर आयोजित समारोह में कही।
उन्होनें कहा कि हमारा मूल स्वभाव प्रकाश की ओर बढऩा है। इसलिए हम प्रकाश का यह पर्व मनाते हैं। हमें अंदर के अंधकार को वैदिक ज्ञान से दूर कर स्वयं को प्रकाशित करना चाहिए। महर्षि दयानन्द का निर्वाण दिवस हमें यही शिक्षा प्रदान करता है। जैसे उन्होनें स्वयं को वेदों के आलोक से प्रकाशित किया और जीवनभर समाज में व्याप्त अज्ञान, अंधविश्वास और कुरीतियों को दूर करते रहे वैसे ही हमें भी करना चाहिए।
इस अवसर पर श्रीमती सुदेश आहूजा व्याख्याता राजकीय महाविद्यालय कोटा ने कहा कि वेदों में अग्रि और सूर्य की उपासना हमें अंधकार से प्रकाश की ओर जाने की प्रेरणा प्रदान करती है।
आर्य समाज के जिला प्रधान अर्जुन देव चढ्ढा ने कहा कि वेद हमें परोपकार करने का आदेश देते हैं, इसलिए हमें जरूरतमंद, निराश्रित और दुखी मानवता की सेवा पर उनके जीवन में खुशियां लानी चाहिए।
आर्य विद्वान रामप्रसाद याज्ञिक ने कहा कि दीपावली वैदिक पर्व है। वैदिक काल में इसे शारदीय नवसस्येष्टी कहा जाता था और नई फसल आने पर सर्वप्रथम आज ही के दिन उसकी यज्ञों में आहुति प्रदान कर यह पर्व मनाया जाता था।
गायत्री विहार आर्य समाज के प्रधान अरविन्द पाण्डेय ने कहा कि आज दीपावली के ही दिन सन् 1883 में अजमेर में आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती ने देहत्याग की थी। देहावसान के अवसर पर उनके अदम्य आत्मविश्वास और दृढ़ ईश्वर भक्ति को देखकर गुरूदत्त विद्यार्थी जैसा नास्तिक व्यक्ति भी आस्तिक बन गये थे।
कार्यक्रम के अध्यक्ष राजस्थान प्रतिनिधि सभा के उपप्रधन हरिदत्त शर्मा ने कहा हमें आर्य अनुकूल संस्कार नई पीढ़ी में डालने चाहिए। उन्होंने नमस्ते का महत्व बतलाया। कार्यक्रम का प्रारम्भ आचार्य अग्निमित्र शास्त्री के पौरहिव्य में आयोजित शारदीय नवसस्येष्टी (यज्ञ) से हुआ। इस अवसर पर उपस्थित जनों द्वारा वेद के मंत्रों से विधिवत् नवीन अन्न की आहुतियां प्रदान की गई।
कार्यक्रम में जिला आर्य सभा कोटा द्वारा दशहरा मेले में आयोजित वैदिक साहित्य एवं महर्षि दयानन्द जीवन दर्शन प्रदर्शनी में किये गये उल्लेखनीय सेवा कार्यों के उपलक्ष में महर्षि दयानन्द वेद प्रचार समिति के अध्यक्ष श्री अरविन्द पाण्डेय का आर्य समाज जिला सभा द्वारा शॉल ओढ़ाकर स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया, साथ ही आर्य समाज गायत्री विहार द्वारा दशहरा मेला चित्र प्रदर्शनी में उल्लेखनीय सेवाओं के लिए पं. क्षेत्रपाल आर्य और श्योराज वशिष्ठ को माल्यार्पण और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में श्रीमती सुशीला कुर्मी, श्रीमती उषा भटनागर और बालिका विभूती वासुदेव द्वारा सुमधुर भजन प्रस्तुत किये गये।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में कोटा के सभी आर्य समाजों के अधिकारीगण तथा सदस्य और गणमान्य जन उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन और अंत में धन्यवाद ज्ञापन आर्य समाज गायत्री विहार के मंत्री उमेश कुर्मी द्वारा किया गया।
अरविन्द पाण्डेय
प्रधान
आर्य समाज गायत्री विहार
मो. 97994-98477

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