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रोहिंगा “जम्मू छोड़ो”

Apr 11 • Samaj and the Society • 741 Views • No Comments

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राजीव चौधरी

अवैध तरीके से रह रहे रोहिंग्या मुसलमान हिंदुस्तान के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं. वेस्ट बंगाल बॉर्डर पर पहले से ही एजेंसियों के लिए सिरदर्द बन चुके रोहिंग्या अब देश भर में तबाही फैलाने की साजिश में जुटे हैं. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन रोहिंग्या मुसलमानों को एक्सप्लाइट कर आतंकी वारदातों को अंजाम दिलवा रहे हैं. बेशक रोहिंग्या नाम कुछ लोगों के लिए नया हो, लेकिन हिंदुस्तान के हर कोने में बड़े पैमाने पर मौजूद रोहिंग्या मुस्लिम देश के लिए खतरे की घंटी बजा चुके हैं. देश की जांच एजेंसियों को लगातार मिल रहे इनपुट के मुताबिक म्यांमार के रोहिंग्या देश में आतंकी गतिविधियां बड़े पैमाने पर फैलाने की फिराक हैं. इनके पीछे आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा असली चेहरा है. रोहिंग्या मुसलमानों की आड़ में हिदुस्तान में बड़े पैमाने पर आतंक फैलाने की पाकिस्तानी साजिश का खुलासा साल 2013 में नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार आतंकी अब्दुल करीम टुंडा ने कर दिया था.

दरअसल, रोहिंग्या मुसलमान के रहन, सहन, खान-पान और तमाम तौर-तरीके बंगालियों की तरह होते हैं, लिहाजा इनकी पहचान करना काफी मुश्किल होता है. वेस्ट बंगाल के बॉर्डर इलाकों में बड़े पैमाने पर इन लोगों ने अपना ठिकाने बना लिया है. वहीं से गैर-क़ानूनी धंधों के अलावा पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के लिए अब बड़ी मुश्किल बन चुके हैं. अब सवाल यह उठता कि आखिर कौन है ये रोहिंग्या मुसलमान? तो धार्मिक आंकड़ों को ध्यानपूर्वक देखने से पता चलता है कि म्यांमार (बर्मा) की बहुसंख्यक आबादी बौद्ध है. म्यांमार में एक अनुमान के मुताबिक 10 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं. इन मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि वे मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं. सरकार ने इन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है. हालांकि ये म्यामांर में पीढ़ियों से रह रहे हैं और वहां के रखाइन स्टेट में 2012 से सांप्रदायिक हिंसा जारी है. इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जानें गई हैं और एक लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं. रोहिंग्या कार्यकर्ताओं का कहना है कि 100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. म्यामांर के सैनिकों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के संगीन आरोप लग रहे हैं. सैनिकों पर प्रताड़ना, बलात्कार और हत्या के आरोप लग रहे हैं. हालांकि सरकार ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है. कहा जा रहा है कि सैनिक रोहिंग्या मुसलमानों पर हमले में हेलिकॉप्टर का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.

कहा जाता है कि साल 1994 में पहली बार रोहिंग्या चीफ युनुस पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा के कांफ्रेंस में पहुंचा. वहां हाफिज सईद ने रोहिंग्या मुसलमानों के लिए पाकिस्तान आवाम से पैसे देने की बात कही गई. इनके कई आतंकी ग्रुप बन चुके हैं. आकरन रोहिंग्या इस्लामिक फ्रंट का चीफ ब्रिटेन में रह कर भारत-बांग्लादेश और भारत-बर्मा बार्डर पर आतंक फैला रहा है.करांची में मौजूद अब्दुल कूदुस बर्मी और अब्दुल हामिद रोहिंग्या मुसलमानों के आतंकी ग्रुप का सबसे बड़ा चेहरा बने हुए हैं. ये पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के इशारे पर भारत-बांग्लादेश और बर्मा में तबाही मचाने की साजिश रच रहे हैं. हिंदुस्तान में रोहिंग्या के हक की बात उठाने के लिए कइ बार आतंकी हमले हुए और गया के बौद्ध मंदिर को निशाना बनाया गया.

इस ताजा मामले को देखे तो बांग्लादेश रोहिंग्या मुसलमानों को शरणार्थी के रूप में स्वीकार नहीं कर रहा है. रोहिंग्या और शरण चाहने वाले लोग 1970 के दशक से ही म्यांमार से बांग्लादेश आ रहे हैं जबकि कुछ बड़ी संख्या में जम्मू से लेकर भारत के अनेक राज्यों में बस चुके है. फिलहाल जम्मू के अलग-अलग इलाकों में रोहिंग्या को निशाना बनाते हुए “जम्मू छोड़ो” के पोस्टर लगाए गये क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचआरसी) ने मोहम्मद को जो “शरणार्थी कार्ड” दिया था वो भी इस 13 फरवरी को ख़त्म हो गया. जम्मू में इन पोस्टरों ने म्यांमार से आकर बसने वाले रोहिंग्या मुसलमानों के होश उड़ा दिए हैं. ये पोस्टर जम्मू और कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी यानी जेकेएनपीपी ने लगाए हैं. इन पोस्टरों पर लिखा है, “डोगरा की विरासत, संस्कृति और पहचान बचाने के लिए, आइए हम जम्मूवासी एकजुट हों.” हालाँकि सूबे की विधानसभा में पैंथर्स पार्टी का कोई मंत्री नहीं है.

दरअसल अक्तूबर 2016 में दक्षिण कश्मीर में हुई एक मुठभेड़ में मारे गए दो विदेशी चरमपंथियों में से एक पड़ोसी देश म्यांमार का मूल निवासी निकला था. तब विश्व हिंदू परिषद् की राज्य इकाई ने रोहिंग्या शरणार्थियों को “जम्मू की सुरक्षा के लिए खतरा” बताते हुए राज्य से बाहर करने मांग की थी. जेकेएनपीपी के अध्यक्ष हर्षदेव सिंह ने इस मामले में अपनी आवाज उठाते हुए राज्य और केंद्र की सरकार पर सवाल दागा है कि “क्या राज्य के किसी भी हिस्से में रोहिंग्या के बसने के लिए क़ानून इजाजत देता है? संविधान की धारा 370 के अनुसार जम्मू कश्मीर में किसी का आकर बसना गैरक़ानूनी है. अगर राज्य सरकार उन्हें बाहर नहीं करती तो हम ये काम करेंगे.” अब इसमें देखने वाली बात यह है कि केंद्र में भाजपा की सरकार है, जम्मू कश्मीर में पीडीपी-भाजपा की गठबंधन सरकार है. तो फिर उन्हें बांग्लादेश और रोहिंग्या मामले को सुलझाने से कौन रौक रहा है.?

 

 

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