8a207892-81de-4d74-b09a-2367a5397560

विश्व पुस्तक मेले में हिन्दू समाज का जागृत प्रहरी बना आर्य समाज

Jan 10 • Arya Samaj • 104 Views • No Comments

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...

देश की राजधानी दिल्ली में पांच जनवरी से पुस्तक मेले का शुभारम्भ हो गया है। मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय द्वारा बनाई गई स्वायत्त संस्था राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट द्वारा पुस्तक मेले का आयोजन किया जाता है। इसके एक पहलू को देखें तो इस पुस्तक मेले के आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों में पुस्तकों के प्रति रुचि पैदा करना है। दूसरा पाठकों को एक ही स्थान पर विभिन्न विषयों की हजारों पुस्तकें मिल मिल जाना होता है, साथ प्रकाशकों को भी अपनी पुस्तकें प्रस्तुत करने के लिए एक उचित मंच उपलब्ध हो जाता है। पुस्तक मेले में इतिहास, भूगोल, ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, यात्रा, धर्म, भाषा, आत्मकथाएं, लोककथाएं, मनोरंजन, सहित अनेकों विषयों पर पुस्तकें मिल जाती हैं। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि कोई विषय ऐसा नहीं होता जिस पर विश्व पुस्तक मेले में पुस्तक न मिले।

किन्तु इसका एक दूसरा हिस्सा भी हैं जहाँ विधर्मी समुदाय हमारे ग्रंथो पर हमला भी कर रहे है। नकली मनु स्मृति से लेकर अनेकों ग्रन्थ गलत तरीकों से छापकर बेचे जा रहे है। आप पुस्तक मेले में आकर स्वयं देख सकते है कि इस्लाम के मानने वालों से लेकर ईसाई व कई अन्य पंथ अपनी पुस्तकें निशुल्क वितरित करते मिल जायेंगे। युवा-युवक युवतियों को निशाना बनाया जा रहा है उनके अन्दर हमारे ही ग्रंथो के प्रति नकारात्मक भावों को पिरोने की कोशिश की जा रही है। हालाँकि हिन्दू धर्म से जुड़ें अनेकों बाबाओं के स्टाल आपको पुस्तक मेले में देखने को मिलेंगे, किन्तु जब आप देखेंगे कि उन सभी स्टालों पर बाबाओं के कथित चमत्कारों से जुडी पुस्तकें या फिर हमारे ही मिलावटी ग्रन्थ वहां बेचें जा रहे है, कोई आसाराम को निर्दोष बताता मिलेगा तो कोई राधे माँ का गुणगान करता दिख जायेगा. ओशो का अश्लील साहित्य बिकता मिलेगा। किन्तु हिंदी साहित्य हाल में केवल और केवल आर्यसमाज ही राष्ट्रवादी, समाज सुधारक, नवचेतना, सदाचारी, पाखंडों से मुक्ति दिलाने वाला, विधर्मियों के जाल से बचाने वाला साहित्य वितरित करता दिखेगा।

सही अर्थो में 13 जनवरी तक चलने वाले इस विश्व पुस्तक मेले में एक बार फिर दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में आर्यसमाज ही हिन्दू समाज का जागृत प्रहरी बनकर खड़ा है। जागृत प्रहरी क्यों बना, इस बात से भी परिचित होना जरुरी है क्योंकि समाज के अतीत, वर्तमान और भविष्य का हमेशा ज्ञान द्वारा मार्गदर्शन होता रहा है और इसमें पुस्तको की सबसे प्रभावशाली भूमिका रही है। मसलन अतीत से लेकर अभी तक ज्ञान की अनवरत बहती धारा का नाम पुस्तक है और इसका संगम वर्तमान काल में पुस्तक मेले हैं। आप सभी को ज्ञात होगा मध्यकाल से लेकर आर्य समाज की स्थापना तक ज्ञान की अनावरत धारा को कुछ लालची और विधर्मी लोगों द्वारा अज्ञानता का कचरा डालकर मेला करने का कार्य वृहत रूप से हुआ, हमारे अनेकों में मिलावट की गयी, स्रष्टि के आदि ग्रन्थ मनुस्मृति को अशुद्ध किया गया और तो और हमारे धार्मिक ग्रन्थ रामायण गीता और महाभारत में भी हमारे महापुरुषों के जीवन चरित्र से लेकर कथानक को अशुद्ध किया गया।

फलस्वरूप समाज अपने विशुद्ध वैदिक ज्ञान से दूर हुआ अज्ञानता को ही सत्य स्वीकार हमने वर्षों की गुलामी की बेड़ियों को अपना हार समझ लिया। इसके पश्चात स्वामी दयानन्द सरस्वती जी आये उन्होंने सर्वप्रथम अपने ग्रंथो की शुद्धि कर मिलावट और अज्ञानता को दूर करने का कार्य किया। हमें अपनी असली सस्कृति और धर्म से परिचय कराया और नया विशुद्ध साहित्य रच हमें एक अस्त्र के रूप में दिया।

तब से लेकर आज तक आर्य समाज स्थान-स्थान और समय-समय पर अज्ञानता के रण में ज्ञान के इन अस्त्रों का प्रयोग कर समाज में चेतना जगाने का कार्य कर रहा है. इसी क्रम में वर्षों पहले जब ये एहसास किया गया कि देश भर में लगने वाले पुस्तक मेलों में विधर्मी लोग अभी भी अपनी स्वरचित पुस्तकों के माध्यम से हमारे धर्म और संस्कृति पर हमला कर रहे है तब यह फैसला लिया गया कि क्यों न हम भी अपने इस ज्ञान के अस्त्रों का प्रयोग पुस्तक मेले के माध्यमों से करें!

तत्पश्चात देश भर लगने वाले पुस्तक मेलों में दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा ने आर्ष ग्रंथो, विशुद्ध मनुस्मृति से लेकर रामायण और महाभारत सहित वैदिक साहित्य को लेकर भाग लेना शुरू किया. जैसा कि आप सभी भलीभांति परिचित होंगे देश की राजधानी दिल्ली में तो प्रतिवर्ष सत्यार्थ प्रकाश 10 रूपये में उपलब्ध कराया ही जा रहा हैं साथ ही एक स्टाल शंका समाधान का भी रखा जाता है जिसमें वैदिक विद्वान मेले पधारे लोगों की धर्म, आत्मा,जन्म, पूर्वजन्म से लेकर ईश्वर के निराकार होने और वेदों में गोमांस भक्षण निषेध जैसे सभी विषयों पर शंकाओं का समाधान भी करते है.

एक किस्म से कहें तो आर्य समाज प्रतिवर्ष हिन्दू समाज के जागरण का एक प्रहरी बनकर पुस्तक मेले में जाता हैं. हिंदी, अंग्रेजी,बंगला एवं उर्दू में सत्यार्थ प्रकाश लोगों को उपलब्ध कराता मिलेगा. स्वामी दयानंद जी के अन्य ग्रंथो संस्कारविधि, ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, आर्योद्देश्यरत्नमाला आदि को सस्ते मूल्य पर उपलब्ध कराया जाता है. हम आशा करते है कि भविष्य में भी आर्यसमाज पुस्तक मेलों के माध्यम से वैदिक धर्म के नाद को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचायेगा. आप सभी से भी अनुरोध है एक बार पुस्तक मेले में जरुर पधारिये आर्य समाज के स्टाल पर आकर इस वैदिक नाद और अधिक गुंजायमान कीजिए..राजीव चौधरी

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)

« »

Wordpress themes