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वेदों में गाय की महत्ता

Aug 13 • Arya Samaj • 1014 Views • No Comments

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यजुर्वेद में प्रश्नोत्तर के माध्यम से बताया गया है कि “गोस्तु मात्रा न विद्यते” अर्थात् गाय के गुणों की कोई सीमा या मात्रा नहीं होती । गाय का महत्व इसीलिए कहा गया है कि वह अनेक प्रकार से मनुष्य की कामनाओं को पूर्ण करती है । गाय का दूध अमृत के तुल्य है क्योंकि गौदुग्ध में पौष्टिकता अधिक है, उसमें शक्ति के साथ स्फूर्ति भी है । गाय का दूध रोगी व्यक्ति को निरोग और बलिष्ठ, निर्बल को बलयुक्त, कृश व्यक्ति को हृष्ट-पुष्ट बनाता है । गाय के पांच वस्तुयें (अवयव) औषधि के रूप में प्रयोग में आते हैं, जिसको पंचगव्य नाम से कही जाती है । गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर का पानी को सामूहिक रूप से पंचगव्य कहा जाता है। आयुर्वेद में इसे औषधि की मान्यता है। समाज में कोई भी शुभ-कार्य इनके बिना पूरे नहीं होते। यहाँ तक कि गाय के मूत्र और गोबर तक को शुद्ध और पवित्र माना जाता है ।

भारत में वैदिक काल से ही गाय का महत्व माना जाता है। आरम्भ में आदान-प्रदान एवं विनिमय आदि के माध्यम के रूप में गाय का उपयोग होता था और मनुष्य की समृद्धि की गणना उसकी गौसंख्या से की जाती थी। “गावो भगो गाव इन्द्रः…” अर्थात् गाय को सौभाग्य का सूचक कहा जाता है और उसे ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है । “यूयं गावो मेदयथा कृशं चिद्…” गाय के दूध से निर्बल व्यक्ति सबल बनता है और कृश व्यक्ति सुन्दर सुडौल बन जाता है । वेद में कहा है कि “अघ्न्येयं सा वर्धतां महते सौभगाय” अर्थात् घर में सौभाग्य के लिए अवध्य गाय का पालन करना चाहिए, उसकी कभी हिंसा नहीं करनी चाहिए । “व्रजं कृणुध्वं स ही वो नृपाण:” अर्थात् गाय की सुरक्षा के लिए गौशाला का निर्माण करें, जिससे उनकी सुरक्षा हो सके और खान-पान की व्यवस्था ठीक हो सके ।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विचार करें तो गाय धरती पर एकमात्र ऐसा प्राणी है जो आक्सीजन ग्रहण करता है और आक्सीजन ही छोड़ता है । गाय के मूत्र में पोटाशियम, सोडियम, नाइट्रोजन, फॉस्फेट, यूरिया एवं यूरिक-एसिड होता है । गाय का दूध चर्बी-रहित और शक्ति देनेवाला होता है । जितना भी पीने से मोटापा नहीं बढ़ता तथा स्त्रियों के रोग में भी लाभदायक होता है । गोबर के उपले जलाने से मक्खी, मछर आदि नहीं होते तथा दुर्गन्ध का भी नाश होता है । गौ-मूत्र सुबह खाली पेट पीने से कब्ज आदि रोग दूर हो जाते हैं और इस प्रकार के अनेक जटिल रोग ठीक हो जाते हैं ।

गाय के गोबर में विटामिन बी-12 बहुत मात्रा में उपलब्ध होता है अतः ब्रेन, स्पाइनल कोर्ड और नसों के कुछ तत्वों की रचना में भी सहायक होता है। हमारी लाल रक्त कोशिशओं का निर्माण भी इसी से होता है। यह शरीर के सभी हिस्सों के लिए अलग-अलग तरह के प्रोटीन बनाने का भी काम करता है। यह रेडियो-धर्मिता को भी सोख लेता है । गौ दुग्ध हमारे स्मरण-शक्ति को बढाता है । गौ-माता के शरीर पर प्रतिदिन 15-20 मिनट हाथ फेरने से ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी एकदम ठीक हो जाती है । गौ-माता के शरीर से निकलने वाली सात्विक तरंगे आस-पास के वायुमंडल को प्रदूषणरहित बनाती है । गौ या उसके बछड़े के रंभाने से निकलने वाली आवाज़ अनेक रोगों को नष्ट करती है । इस प्रकार गाय से अनेक प्रकार के लाभ होते हैं, उन लाभों को अच्छी तरह जानकर गाय की रक्षा करें और उसका सदुपयोग करें जिससे पुरे समाज का कल्याण हो ।

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