सतलोक आश्रम, करोंथा कांड.

May 15 • Category, Pakhand Khandan, Samaj and the Society • 1861 Views • No Comments

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करौंथा के सतलोक आश्रम पर दोबारा कब्जे के लिए आर्यसमाजी व ग्रामीण रविवार सुबह से देर रात तक अड़े रहे। इसके लिए गरीबदास धाम में बैठक के बाद आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष आचार्य बलदेव के नेतृत्व में आश्रम की तरफ कूच करते आर्यसमाजी व ग्रामीण।
यूं चला रविवार का घटनाक्रम

6.00 बजे आर्य समाज के लोगों ने आश्रम के सामने हवन शुरू किया। पुलिस ने इसका विरोध किया। इससे मामला भड़क गया।

8.00 बजे आचार्य बलदेव को हिरासत में लेने से भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। भीड़ आगजनी पर उतर आई।

10.20 बजे पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए फायरिंग की। पानीपत के संदीप को गोली लगी, जिससे उसने दम तोड़ दिया।

9.00 बजे रात में प्रदेश के डीजीपी एसएन वशिष्ठ रोहतक पहुंचे। उन्होंने मामले को निपटाने के लिए नए सिरे से रणनीति बनाई।

9 जून 2006 : झज्जर के छुड़ानी की कोठी दयाल धाम आश्रम के एक भक्त द्वारा लिखित पुस्तक सैतान बणया भगवान के विरोध में रामपाल समर्थकों ने कोठी दयाल धाम पर हमला बोल दिया। इस हमले में आश्रम प्रमुख ब्रह्मस्वरूप सहित कई लोग घायल हुए।

7 जुलाई 2006 : करौंथा आश्रम से 3 लोग गिरफ्तार किए गए।

8 जुलाई 2006 : करौंथा आश्रम के श्रद्धालुओं ने तीन लोगों की गिरफ्तारी के विरोध में झज्जर-रोहतक हाइवे को जाम कर दिया और गिरफ्तार लोगों को छोड़ने की मांग की। इसी दिन डीघल में 27 खाप के प्रधान जयसिंह की अध्यक्षता में पंचायत हुई।

9 जुलाई 2006 : पंचायत प्रतिनिधियों ने आश्रम की संदिग्ध गतिविधियों को लेकर बहादुरगढ़ आगमन पर सीएम से बातचीत की।

10 जुलाई 2006 : डीघल जाम लगा दिया। गुरु पूर्णिमा पर रामपाल समर्थक आश्रम तक न पहुंचे, इसके लिए ग्रामीण तैनात हो गए।

11 जुलाई 2006 : डीघल व आसपास के ग्रामीण इस बात पर अड़े रहे कि जब तक करौंथा आश्रम के खिलाफ जांच शुरू नहीं होती, तब तक जाम जारी रहेगा। इस तरह जाम चौथे दिन भी जारी रहा।

12 जुलाई 2006 : आश्रम के बाहर उपद्रव, एक की मौत।

13 जुलाई 2006 : आश्रम संचालक रामपाल महाराज को 24 सहयोगियों सहित गिरफ्तार कर लिया गया। तत्कालीन एसडीएम वत्सल वशिष्ठ ने आश्रम को अपने कब्जे में ले लिया।

अगस्त 2006 : रामपाल ने हाईकोर्ट में दी प्रशासन के फैसले को चुनौती।

नवंबर 2009 : हाईकोर्ट का प्रदेश सरकार को आश्रम दोबारा संत रामपाल के ट्रस्ट को सौंपने का आदेश। प्रदेश सरकार और आर्य प्रतिनिधि सभा ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती।

18 फरवरी 2013 : सुप्रीम कोर्ट में सरकार व प्रतिनिधि सभा की याचिका खारिज।

24 फरवरी 2013 : रामपाल के ट्रस्ट ने एसडीएम कोर्ट में आश्रम का कब्जा लेने के लिए लगाई याचिका।

11 मार्च 2013 : एसडीएम ने आश्रम के रिसीवर सदर थाना प्रभारी को पत्र लिखकर जल्द आश्रम को ट्रस्ट के हवाले करने का दिया आदेश।

7 अप्रैल 2013 : गुपचुप तरीके से आश्रम के रिसीवर सदर थाना प्रभारी सतेंदर ने आश्रम ट्रस्ट को सौंप दिया।

9 अप्रैल 2013 : सतलोक आश्रम पर पथराव और रोहतक-झज्जर हाईवे 8 घंटे जाम। आर्य समाजियों को प्रशासन का रात 12 बजे 30 अप्रैल तक आश्रम को दोबारा कब्जे में लेने का आश्वासन, जाम खुला।

10 अप्रैल 2013 : सैकड़ों रामपाल समर्थकों का आश्रम में डेरा, करौंथा में धारा 144 लागू।

11 अप्रैल 2013 : प्रशासन ने सतलोक आश्रम में भी धारा 144 लागू करने और संत रामपाल के अनुयायियों को बाहर भेजने की बात कही।

17 अप्रैल 2013 : रामपाल समर्थकों की याचिका पर सिविल जज ने प्रशासन को एक सप्ताह तक आश्रम में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।

24 अप्रैल 2013 : सिविल कोर्ट ने प्रशासन को दोबारा 27 अप्रैल तक यथास्थिति के निर्देश दिए।

25 अप्रैल 2013 : आर्य प्रतिनिधि सभा का सतलोक आश्रम के सामने दो कनाल जमीन खरीदने का खुलासा, जहां आर्य समाज मंदिर बनाने की बात कही गई।

28 अप्रैल 2013 : सिविल जज ने प्रशासन को 8 मई तक आश्रम में यथास्थिति के आदेश दिए। प्रशासन की 30 अप्रैल तक आश्रम खाली कराने की योजना को झटका।

2 मई 2013 : आर्य समाजियों की संघर्ष समिति ने बैठक कर 12 मई को निर्णायक कदम उठाने का फैसला लिया।

8 मई 2013 : कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख, 10 मई तक प्रशासन को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिए।

10 मई 2013 : कोर्ट ने संत रामपाल समर्थकों को बड़ी राहत देते हुए अफसरों को आदेश दिए कि आश्रम की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

12 मई 2013 : 3 की मौत, 100 घायल

इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोई भी कानून को हाथ में न ले, क्योंकि इसका फायदा असामाजिक तत्व उठा सकते हैं।’ -भूपेंद्र सिंह हुड्डा, मुख्यमंत्री, हरियाणा

वरिष्ठ संवाददाता, रोहतक : करौंथा में सुबह करीब नौ बजे आर्य समाज और आसपास के गांवों के रामपाल दास विरोधी लोग प्रदर्शन करते हुए जब आश्रम की तरफ बढ़े तो पुलिस कर्मियों ने उनको रोकना चाहा। प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच संघर्ष हो गया। ऐसे में कुछ देर तक पुलिस कर्मियों ने प्रदर्शनकारियों का मुकाबला किया, लेकिन बाद में पुलिस कर्मी वहां से भागने लगे। पुलिस कर्मी ही नहीं, प्रशासनिक अधिकारी भी वहां से खिसक गए। जिसके कारण प्रदर्शनकारी हावी हो गए, और उन्होंने शराब ठेका और एंबुलेंस की बस फूंक डाली। जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष हुआ, वो जगह आश्रम से करीब दो किलोमीटर दूर थी। अगर प्रदर्शनकारी आश्रम पर पहुंच जाते तो आश्रम में बंद रामपाल दास के हजारों अनुयायियों के साथ झगड़ हो सकती थी। भगवान का शुक्र है कि प्रदर्शनकारी आश्रम तक नहीं पहुंच सके, क्योंकि आश्रम की साइड में तैनात डीएसपी सुमित कुहाड़ और डीएसपी धारणा यादव ने पुलिस कर्मियों के साथ मिलकर प्रदर्शनकारियों का बहादुरी के साथ मुकाबला किया। लेकिन जो करौंथा गांव के बस स्टैंड पर सैकड़ों पुलिस कर्मी थे, वे वापस भागकर रोहतक पहुंच गए। पुलिस कर्मियों में प्रदर्शनकारियों का ऐसा खौफ था कि उनको भागने में जो वाहन मिला, उसी में लटक लिए। दमकल विभाग की गाड़िया, राहगीरों के निजी वाहन, दोपहिया वाहनों में लिफ्ट मांगते नजर आएं। पुलिस कर्मियों का ऐसे स्थिति में वापस लौटना बड़ी तबाही की और इशारा कर रहा था।

पुलिस की रणनीति भी नहीं हुई सफल

जिला पुलिस प्रशासन ने हालांकि पुलिस बल तो हजारों की संख्या में तैनात किया था, लेकिन अगवाई में सुनारिया और मधुबन पुलिस अकादमी के प्रशिक्षाणार्थी शामिल थे। जिनके हाथों में लाठी व डंडे दिए गए थे। ऐसे में उनको हिंसा या उपद्रव के दौरान पार पाने की अनुभव कम था। अगर प्रशिक्षित पुलिस कर्मियों को प्रदर्शनकारियों का मुकाबला करने के लिए आगे किया जाता तो शायद पुलिस प्रशासन को पीछे नहीं हटना पड़ता। पुलिस कर्मियों का प्रदर्शनकारियों के आगे भागने से मुकाबला कर रहे अन्य पुलिस कर्मियों का भी मनोबल टूटना शुरू हो गया था।

इन अधिकारियों ने दिखाया साहस

भड़की हिंसा में तहसीलदार प्रमोद चहल, डीएसपी सुमित कुहाड़, डीएसपी धारणा यादव, डीएसपी पुष्पा खत्री, इंस्पेक्टर ललित कुमार, इंस्पेक्टर कुलदीप बेनीवाल मौके पर मोर्चा संभाले हुए थे। तहसीलदार प्रमोद चहल प्रदर्शनकारियों के बीच में पहुंच गए, जहां प्रदर्शनकारियों ने उनपर हमला कर घायल कर दिया। डीएसपी सुमित कुहाड़ और धारणा यादव आश्रम की तरफ दीवार बन कर खड़े हुए थे। अगर प्रदर्शनकारी यहां से आगे बढ़ जाते तो फिर बड़ी जन हानि हो सकती थी।

वरिष्ठ संवाददाता, रोहतक : करौंथा में हुए खूनी संघर्ष का जिम्मेदार काफी हद तक जिला प्रशासन रहा। अगर समय रहते आर्य समाज के लोगों द्वारा दी गई चेतावनी को गंभीरता से लेकर स्थिति को भांप लेता तो शायद रविवार को खूनी संघर्ष की नौबत नहीं आती।

विदित रहे कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जिला प्रशासन ने सात अप्रैल को बंदी छोड़ भक्ति मुक्ति ट्रस्ट को करौंथा सतलोक आश्रम की चाबी सौंपी थी। इसके बाद नौ अप्रैल को आर्य समाज के लोगों ने करौंथा पहुंच कर आश्रम के बाहर प्रदर्शन करते हुए पथराव भी किया था। इसी दिन जिला प्रशासन की तरफ से आर्य समाज के लोगों को आश्रम को 30 अप्रैल तक दोबारा से सीआरपीसी की धारा 145 के तहत कब्जे में लेने का आश्वासन दिया था। जिला प्रशासन के आश्वासन के बाद आर्य समाज के लोग शांत होकर बैठ गए थे, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और 30 अप्रैल की तारीख निकल गई। जब अधिकारी दिए गए आश्वासन पर खरे नहीं उतरे तो आर्य समाज ने एक मई को दयानंद मठ में मीटिंग करके रामपाल दास विरोधी संघर्ष समिति का गठन किया और 12 मई को आश्रम खाली कराने के लिए आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया। इसके बाद रोजाना आर्य समाज के लोग हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान व आसपास के गांव में प्रचार के लिए निकल पड़े। लोगों को 12 मई को करौंथा आश्रम पर पहुंचने के लिए समाज के लोगों को आमंत्रित किया गया। आर्य समाज की रोजाना की गतिविधियों पर भी प्रशासनिक अधिकारियों ने हलके में लिया। यहीं कारण है कि आर्य समाज के लोगों में जिला प्रशासन और करौंथा आश्रम के प्रति नाराजगी बढ़ती गई। रविवार को खूनी संघर्ष इसी नाराजगी का कारण रहा है। आर्य समाज द्वारा दिए गए अल्टीमेटम के दस दिन की अवधि में जिला प्रशासन की तरफ से कोई सार्थक कदम नहीं उठाए गए, जबकि रोजाना आर्य समाज व करौंथा आश्रम अनुयायी प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन देकर आगाह भी किया गया था। ऐसे में इस खूनी संघर्ष को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से फेल रहा।

मुख्य संवाददाता, रोहतक : उपायुक्त विकास गुप्ता ने करौथा आश्रम के मामले में सभी लोगों से शांति बनाए रखने अपील की है और सभी माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना करे। उपायुक्त ने ये बातें प्रेस को जारी बयान में आश्रम विवाद से जुडे़ ग्रामवासियों, संघों व संगठनों के अलावा आम लोगों को सद्भावना बनाए रखने की अपील करते हुए कही।

उपायुक्त ने कहा कि प्रशासन कानून व्यवस्था व शांति बनाए रखने के लिए कृतसंकल्प है। अगर किसी ने भी शांति भंग करने का प्रयास किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

करौंथा पंचायत ने सौंपा उपायुक्त को ज्ञापन

करौंथा की ग्राम पंचायत ने अपने गांव में असामाजिक तत्वों के अशांति फैलाने की आशंका के मद्देनजर उपायुक्त विकास गुप्ता को ज्ञापन सौंपकर गांव मे शांति व कानून व्यवस्था बनाने रखने के लिए आहवान अनुरोध किया है। उपायुक्त को करौथा ग्राम पंचायत के सरपंच कमल सिंह ने बताया कि कुछ संगठन व संघों ने करौथा में इक्कठे होने का प्रस्ताव बनाया है, जबकि पंचायत व खाप किसी प्रकार का कोई झगड़ा या दंगा नहीं भड़काना चाहती। पंचायत विवाद को सुलझाने के लिए है न कि बढ़ाने के लिए। कमल सिंह सरपंच ने 9 अप्रैल को शरारती तत्वों ने कहा कि शरारती तत्व आए दिन गाव में भडकाऊ भाषण देते है और गांव में एकत्रित होने की बात करते है, जिससे गांव में शांति भंग होने का डर बना रहता है। उन्होंने कहा कि गांव सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन का पक्षधर है और सुप्रीम कोर्ट के दिए आदेशों का पालन करता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी भी पक्ष को आदेशों से परेशानी है तो वह अदालत में जा सकता है।

– अशोक आर्य

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