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सोचिए! कहीं आप भी तो मांसाहारी नहीं..?

इंसानी अतीत से एक बहस चली आ रही है कि शाकाहारी और मांसहारी भोजन दोनों में से कौनसा उत्तम है! हालाँकि अभी तक यह बहस सिर्फ धर्म और नैतिकता के तराजू में रखकर होती थी, लेकिन आजकल स्वास्थ्य के लिए कौनसा खाना ज्यादा फायदेमंद है इसके लिए चर्चा होती है। किन्तु इन दलीलों के बीच अब एक नई परेशानी खड़ी हो गयी है कि आज के फास्टफूड के युग में हमें कैसे पता चले कि क्या चीज शाकाहार है और क्या मांसाहार? कहीं ऐसा तो नहीं आप शाकाहारी होने का दंभ भरते रहे पर अनजाने में शादी विवाह से लेकर होटल और रेस्तरों में आप को मांसाहार परोसा जा रहा हो?

यह सवाल इसलिए क्योंकि अभी हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार कई ऐसे खादय पदार्थों का पता चला है जो एक शाकाहारी, भोजन करने वाले के माथे पर सलवटें खड़ी कर सकती है। जैसे कि आप चाव से नान खाना पसंद करते है, वो अलग बात है कि अगर आप शाकाहारी हैं और घर पर नान बनाते हैं। उसे नरम लचीला बनाने के लिए अंडे की जगह कुछ और इस्तेमाल करते हों, लेकिन होटल वाले नान को मुलायम और लचीला करने के लिए अंडे का इस्तेमाल करते हैं। दूसरा अक्सर टीवी विज्ञापनों में कुकिंग ऑयल में ओमेगा-3 और विटामिन डी आदि को सेहत के लिए खासकर आंखों और दिल के लिए बड़ा उपयुक्त बताया जाता है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ओमेगा 3 मछली और विटामिन डी भेड़ की हड्डी से प्राप्त किया जाता है और उसे तेल में मिलाया जाता है।

असल में कई ऐसी चीजें है जिनका उपयोग लोग दैनिक जीवन में करते है लेकिन वह पूर्णतया शाकाहार नहीं है। जैसे चीनी जिसे शुगर भी कहा जाता है अगर आप रिफाइंट शुगर का प्रयोग करते हैं तो जान ले कि चीनी को सफेद बनाने के लिए लिए नैचुरल कार्बन का इस्तेमाल किया जाता है जो जानवरों की हड्डियों से बनाया जाता है।

इसके अलावा जैम, जैली और होटल आदि में मिलने वाले सूप में भी जानवरों और मछलियों आदि प्राप्त की गई कई चीजों का मिश्रण होता है। यही नहीं बहुत से लोग जो शराब या बियर पीते है लेकिन मांस नहीं खाते वह अक्सर कहते पाए जाते कि वह पूर्ण शाकाहारी है। लेकिन बियर, वाइन या अन्य रिफाइंड शराब को साफ करने के लिए इजिनग्लास नाम के पदार्थ का उपयोग किया जाता है, जो कि मछली के ब्लेडर से बनाया जाता है, इसलिए ये भी पूरी तरह से शाकाहारी नहीं है।

अब हो सकता है बहुत से लोग यह सोचे कि जब इन चीजों में मांस का इस्तेमाल किया जाता है तो आखिर शाकाहार क्या है? असल में शाकाहार की एक सरल सी परिभाषा ये है कि शाकाहार में वे सभी चीजें शामिल हैं जो वनस्पति आधारित हैं, पेड़ पौधों से मिलती हैं एवं पशुओं से मिलने वाली चीजें जिनमें कोई प्राणी जन्म नहीं ले सकता। उदाहरण के लिये दूध, शहद आदि से बच्चे जन्म नहीं लेते जबकि अंडे जिसे कुछ तथाकथित बुद्धजीवी शाकाहारी कहते है, उनसे बच्चे जन्म लेते हैं इस वजह से अंडे मांसाहार है।

कुछ समय पहले मांसाहार पर कई तथ्य और शोध पढने को मिले इनमें एक था कि मांस हमें इस वजह से नहीं खाना चाहिए क्योंकि यह एंजाइमों से भरा होता है। इसके माध्यम से नकारात्मकता और भय का संचार होता है। जब जानवरों को वधशाला या बूचड़खाना लाया जाता है, तो उन्हें पता होता है कि उन्हें मारा जायेगा। इस कारण अपने-आप ही उनके अंदर भय, पीड़ा और दुख का भाव आ जाता है। उनकी इन भावनाओं का प्रसार उनके संपूर्ण शरीर में होने लगता है। भय और पीड़ा के कारण उनके शरीर में एड्रालिन नामक एंजाइम का स्राव होता है जिसका प्रवाह रक्त की धारा में होने लगता है। इस कारण इससे जुड़ी हर चीज नकारात्मक हो जाती है। आप भले की मांस को कितना भी पका लें, आप इन गुणों को कभी भी नष्ट नहीं कर पायेंगे। दूसरा वैज्ञानिक रूप से हमारे दांतों की बनावट ऐसी नहीं है कि हम मांस को खा सकें। और ना ही हमारा पाचन तंत्र मांसों को पचा सकता है। जब हम फल खाते हैं तो इसे एक घंटे में पचा सकते हैं। सब्जियों को हम दो घंटे में पचा सकते हैं, जबकि मांस को पूरी तरह से पचने में 72 घंटे लगते हैं। जब मांस इतने लंबे समय तक हमारी आंतों में रहता है तो यह विषाक्त हो जाता है और इसी कारण हमें कई बीमारियां होती हैं।

एक मुख्य बिंदु यह भी है कि मांस, मछली और अण्डे हमारे शरीर में दुख, अशांति और तनाव पैदा करते हैं। जबकि शाकाहारी भोजन का सेवन करने वाले लोग सेहतमंद तो होते ही हैं साथ ही ऐसे लोगों को थकान भी बहुत कम लगती है। कुछ समय पहले भोजन के प्रभाव पर शोधकर्ताओं ने एक निष्कर्ष निकाला था कि इन्सान से अलग जो जानवर शाकाहारी होते हैं वो मांसाहारी की तुलना में जल्दी हार नहीं मानते हैं और अधिक परिश्रमी भी होते हैं। जैसे हाथी, बैल, घोड़ा, हिरन और ऊंट इसके विपरीत मांसाहारी जानवर कुछ देर तो दौड़ सकते है लेकिन वह जल्दी ही हांफ जाते है। इसलिए अब आप जब कुछ खाएं तो थोडा संभलकर खाएं कहीं ऐसा न हो खुद को आधुनिक दिखाने के चक्कर में आप भी जल्दी बीमारियों को पकड़कर न हांफ जाएँ।

 लेख-विनय आर्य 

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