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क्या वेटिकन को पादरियों के पाप स्वीकार हैं?

साल 2005 में एक फिल्म (सिंस) को सेंसर बोर्ड ने प्रतिबंधित कर दिया था फिल्म केरल के एक पादरी पर आधारित थी जिसमें उसके हवस के कृत्यों को उजागर किया था। कैथोलिक लोगों को यह फिल्म बिलकुल भी पसंद नहीं आई थी जिसके चलते इस फिल्म पर बैन लगा दिया गया था। वैसे देखा जाये तो आमतौर पर भारतीय फिल्मों में सफेद लम्बें चोंगे धारण किये, चर्च के पादरी दया के सागर मानवता और अहिंसा की प्रातिमूर्ति दिखाए जाते हैं। लेकिन असल जीवन में देखें तो वेटिकन के पोप फ्रांसिस अपनी प्रार्थना करने के बजाय अपने इन लंपट पादरियों के कुकर्मों के लिए माफी मांगते घूम रहे हैं। वेटिकन राज्य के पोप फ्रांसिस ने पिछले सप्ताह माना कि कैथोलिक चर्च में पादरियों और बिशपों  ने ननों का यौन उत्पीड़न किया। वेटिकन सिटी की महिलाओं पर केंद्रित एक पत्रिका में पादरियों द्वारा ननों के उत्पीड़न की बात सामने आई है. इसमें कहा गया था कि ननों का गर्भपात कराया गया है या उन्हें अपने बच्चों की परवरिश अकेले करनी पड़ रही है।

इससे पहले जुलाई 2008 में 16 वें पोप बेनेडिक्ट ने भी आस्ट्रेलिया दौरे में पादरियों द्वारा यौनाचार किए जाने के मामलों के लिए भी माफी मांगी थी। उस समय वहां 107 अभियोग सामने थे। पोप दुराचार के शिकार लोगों से मिले थे तथा माफी मांगी थी। उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया तथा युवाओं को भविष्य में पादरियों की वासना हवस से बचाने के लिए प्रभावी तरीके लागू किए जाने का आश्वासन दिया था। एक रिपोर्ट के अनुसार 1980 से 2015 के बीच ऑस्ट्रेलिया के 1000 कैथोलिक संस्थानों में 4,444 बच्चों का यौन उत्पीड़न हुआ था वहीं एक दूसरी जांच के मुताबिक देश के करीब 40 फीसदी चर्च पर बच्चों के यौन शोषण के आरोप हैं।

 अभी तक आस्ट्रेलिया, आयरलैंड, बैल्जियम, अमेरिका पादरियों द्वारा यौन शोषण के सबसे ज्यादा प्रभावित देश माने जाते थे अब इस कड़ी में तेजी से भारत का नाम भी उभरता जा रहा है। चर्च के सीटिंग रूम में, ईसा मसीह की निहारती हुई तस्वीर धीमे-धीमे चलते पंखे और वहां फुसफुसाहट में बात करती ननें ऐसी घटनाओं की जिक्र करती हैं कि जब चर्च से जुड़े पादरी उनके बेडरूम में घुसे और उन्हें अपनी हवस का शिकार बनाया। पिछले दिनों एक नन ने जालंधर के बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर 2014 से 2016 के बीच उसके साथ 13 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया था। पिछले वर्ष ही एक के बाद एक, कुल 5 पादरियों ने एक महिला को ब्लैकमेल कर उसके साथ 380 बार बलात्कार करने की खबर ने भी पादरियों के कारनामों से चर्च पर सवाल खड़े किये थे। 2017 में केरल के कन्नूर में चर्च के पादरी के नाबालिग लड़की के साथ रेप के के मामले में पुलिस ने पांच नन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था।

पादरियों की हवस के शिकार बच्चें और ननों की बातें उजागर होते देख कर वैटिकन को चर्च की अपनी नीव हिलती दिख रही हैं क्योंकि अब आम जनता के नैतिकता के पैमाने बदल गए हैं। चर्च अपने पादरियों की नाजायज संतानों की समस्या को भी झेल रहा है। भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड, जर्मनी, फ्रांस, इटली और आस्ट्रेलिया में कई औरतें पादरियों से गर्भवती हो कर उन के अवैध बच्चों को पालने पर मजबूर हैं। कई चर्चों से इन औरतों से समझौते पर साइन करवा कर मुआवजे दे दिए गए हैं। लेकिन वैटिकन इन मामलों को रोक नहीं पा रहा है। चर्चों के सैक्स किस्से कम होने के बजाय बढ़ते जा रहे हैं। मार्च 2010 में न्यूयार्क टाइम्स की सैक्स स्कैंडलों पर कवरेज के लिए आलोचना भी की गई थी। क्योंकि अखबार ने 200 बहरे बच्चों के साथ पादरियों द्वारा किये गये दुराचार की खबरें प्रकाशित कर दी थीं।

हालाँकि यह कोई नये ताजातरीन मामले नहीं है शुरू से पादरी और बिशप ननों का यौन शोषण करते आ रहे हैं। इसके बावजूद भारत की ननों की समस्या धुंधली पड़ी रहती है। इसकी वजह चुप रहने की संस्कृति भी हो सकती है। कई ननों को लगता है कि शोषण तो आम है, कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं, ज्यादातर ननें तभी बात करती हैं जब उन्हें यह तसल्ली दी जाए कि उनकी पहचान छुपाई जाएगी। दूसरा अनेकों ननें पादरियों को ईसा मसीह का प्रतिनिधि भी मानती हैं धार्मिकता के बहाव में खामोश रह जाती है। तीसरा आवाज उठाने का मतलब आर्थिक परेशानी भी होगी। कई ननों के समूह वित्तीय रूप से पादरियों और बिशपों के अधीन होते हैं। इस सबके बाद यह भी है कि एक अरब से ज्यादा जनसंख्या वाले भारत में कैथिलक ईसाइयों की संख्या करीब 2 करोड़ है। कई ननों को लगता है कि यौन शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करना, चर्च की प्रतिष्ठा धूमिल कर सकता है। अन्य मतों की आलोचना भी झेलनी पड़ेगी इस सबकी आड़ में कैथोलिक चर्च के पादरियों अपनी हवस का खेल रहे हैं जिसकी कीमत ननों और बच्चों को चुकानी पड़ रही है।

लेखक- राजीव चौधरी

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