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स्वामी श्रद्धानन्द के 93वें बलिदान दिवस पर विशाल शोभायात्रा एवं श्रद्धाजलि

राष्ट्र एवं मानव सेवा को समर्पित आर्य समाज के प्रेरणा स्तंभ अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानन्द के 93वें बलिदान दिवस पर आर्य केंद्रीय सभा दिल्ली राज्य के तत्वावधान में विशाला शोभायात्रा एवं वृहद सार्वजनिक सभा का आयोजन 25 दिसंबर 2019 को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में संपन्न हुआ। प्रातः काल 8 बजे से 9:30 बजे तक आचार्य सहदेव शास्त्री जी के ब्रह्मत्व में एवं आर्य समाज नया बांस के सहयोग से स्वामी श्रद्धानन्द बलिदान भवन में यज्ञ के साथ कार्यक्रम का आरंभ हुआ। जिसमें आर्य केंद्रीय सभा दिल्ली व आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली के पदाधिकारियों ने अत्यंत श्रद्धापूर्वक भाग लिया।

शोभायात्रा का नेतृत्व

       हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी शोभायात्रा का समय 10 बजे सुनिश्चित था। दिल्ली में कड़ाके की ठंड और शरद हवाओं के बीच बच्चे, वृद्ध  युवा और नर-नारी सभी अपने गले में पीत वस्त्र, सिर पर पगड़ी पहने हुए समय से पूर्व ही विभिन्न तरह के वाहनों में बैठकर कतार में खड़े हो गए थे। वेद मंत्रों के उच्चारण और वैदिक जयघोष के बीच श्रीमती प्रभा आर्या जी ओम् ध्वज लेकर आगे चली जिसके बाद रथ पर विराजमान स्वामी प्रणावानंद जी, वरिष्ठ वैदिक संन्यासी एवं कई गुरुकुलों के प्रणेता, श्री सुरेंद्र कुमार रैली, वरिष्ठ उपप्रधान, श्री धर्मपाल आर्य प्रधान, दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा, श्री विक्रम नरुला उपप्रधान, श्रीमती उषा किरण आर्या जी, श्री राजेंद्र दुर्गा जी, श्री अजय सहगल जी, सतीश चड्डा, महामंत्री, श्री अरुण वर्मा जी कोषाध्यक्ष, श्री योगेश आर्य जी, श्री जोगेंद्र खट्टर जी, श्री एस.पी.सिंह जी, श्री सुरेंद्र चौधरी जी इत्यादि महानुभावों के दिशा-निर्देशन में हुआ।

शोभायात्रा के विहंगम दृश्य

       आर्यों की यह विशाल शोभायात्रा स्वामी श्रद्धानन बलिदान भवन नया बाजार से शुरू होकर लाहौरी गेट, खारी बावली, चैंक फतेहपुरी, कटरा बनियन, लाल कुंआ, चैंक होज काजी होते हुए अजमेरी गेट के बाद लगभग 3 किलोमीटर का सफर तय करके 12:40 बजे रामलीला मैदान पहुंची। किंतु शोभायात्रा के विहंगम दृश्य आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती, स्वामी श्रद्धानन्द और सभी महापुरुषों के प्रति सच्ची निष्ठा की कहानी बया कर रहे थे। इस अवसर पर लगभग दिल्ली की समस्त आर्य समाजें, आर्य वीर दल दिल्ली प्रदेश, आर्य वीरांगना दल, समस्त गुरुकुल, अनाथालय, आर्य विद्यालय इत्यादि सभी आर्य संस्थाओं से हजारों की संख्या में आर्यजन शोभायात्रा में सम्मिलित थे। चार आर्य विद्यालयों द्वारा आयोजित सुंदर व प्रेरक झाकिंया शोभायात्रा का विशेष आकर्षण बनी। आर्य वीरांगना दल एवं आर्य वीर दल के सभी बच्चे-बच्चियां अपने गणवेश में अनुशासित और व्यवस्थित होकर शक्ति प्रदर्शन करते रहें। जिसमें लाठियां, तलवार और योगासन आदि के प्रेरक करतव शामिल थे । सभी के हाथों में नागरिक संशोधन समर्थन की तक्तियां, वैदिक जयघोष, वेदमंत्रों की सूक्तियां और आर्य समाज के जयघोष दिखाई दे रहे थे। चारों तरफ ईश्वर भक्ति, देश भक्ति और ऋषि भक्ति का वातावरण नजर आ रहा था। बस, ट्रैंपों, ट्रक, बाईक, कार आदि वाहनों पर ओ३म् के ध्वज और बैनर सजे हुए थे। इस अवसर पर महर्षि दयानंद पब्लिक स्कूल आर्य समाज शादी खामपुर, आर्य शिशुशाला, आर्य समाज ग्रेटर कैलाश-1, आर्य गुरुकुल तिहाड़ गांव, गुरु विराजनंद संस्कृतकुलम, आनंद विहार हरिनगर, आर्य समाज प्रीत विहार तथा आर्य समाज कीर्ति नगर के आर्यजनों ने विशेष झांकिया और पूरे रास्ते यज्ञ का आयोजन किया। आर्य समाज कीर्ति नगर की झांकी पर आर्य महिलाएं व पुरुष यज्ञ करते हुए और प्रसाद बांटते हुए आगे बढ़ रहे थे। यह सब सुंदर दृश्य देखने के लिए सड़कों के चारों तरफ लोगों की लंबी-लंबी कतारें थी।

शोभायात्रा का स्वागत

       विभिन्न आर्य समाजों द्वारा बीच-बीच में शोभायात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। जिनमें आर्य समाज सुदर्शन पार्क, ग्रेन मर्चेंट एसो. नया बाजार, आर्य समाज नया बांस, महाशयां दी हट्टी, आर्य समाज पुल बंगश, श्री अशोक अरोड़ा जी- कटरा बनियन, आर्य समाज सीताराम बाजार एवं अन्य कई एसोसेशनों ने शोभायात्रा में भाग लेने वाले सभी नर-नारियों का प्रसाद वितरण कर स्वागत किया। यह शोभायात्रा लगभग 12ः40 बजे रामलीला मैदान के प्रांगण में पहुंच कर एक वृहद सार्वजनिक सभा के रूप में परिवर्तित हो गई।

सार्वजनिक सभा के प्रमुख बिंदु

       स्वामी श्रद्धानन्द को उनके 93वें बलिदान दिवस पर श्रद्धाजलि देने के लिए ऐतिहासिक रामलीला मैदान आर्यजनों से खचाखच भरा हुआ था। विशाल मंच पर अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानन्द की प्रेरक चित्र सौभायमान था। मंच के दोनों तरफ बड़े-बड़े बैनर लगे हुए थे। जिन पर स्पष्ट लिखा था कि नागरिक संशोधन कानून का आर्य समाज समर्थन करता है।  भजनोपदेशक श्रीमती सुदेश आर्य, संगीताचार्य व उनके साथी ने अपने भजनों के माध्यम से प्रभु भक्ति, वेद मंत्र, महर्षि दयानंद जी के गुणगान और स्वामी श्रद्धानन्द जी के श्रद्धाजलि स्वरूप भजन गाए। सभा के आरंभ में एक मिनट की मौन प्रार्थना के साथ गायत्री मंत्र का उच्चारण करके स्वामी श्रद्धानन्द जी को सामुहिक श्रद्धाजलि अर्पित की। इस अवसर पर मंच पर पद्मभूषण महाशय धर्मपाल जी, प्रधान आर्य केंद्रीय सभा, श्री धर्मपाल आर्य जी, प्रधान दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा, डा. सत्यपाल सिंह जी, सासंद बागपत लोकसभा, श्री एस.के.शर्मा. जी महामंत्री प्रादेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा, श्रीमती मोनिका अरोड़ा वरिष्ठ वकील सुप्रीम कोर्ट, श्री सत्यानंद आर्य, श्री वागीश शर्मा, श्री विनय आर्य जी, महामंत्री दिल्ली सभा, श्री रमेश गुप्ता जी, आर्य प्रतिनिधि सभा अमेरिका, श्री अजय सहगल जी, टंकारा ट्रस्ट, श्री विनय विद्यालंकार जी, प्रधान आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तराखंड, श्रीमती उषा किरण जी, श्री विक्रम नरुला जी, श्री अरुण प्रकाश वर्मा जी, श्री योगेश आर्य जी, सहित संन्यासी विराजमान थे।

उद्बोधन

नागरिक संसशोधन कानून का पूर्ण समर्थन करता है-आर्य समाज। विनय आर्य

       सर्वप्रथम श्री विनय आर्य जी स्वामी श्रद्धानन्द जी के द्वारा मानव जाति पर किए गए उपकारों को स्मरण करते हुए कल्याण मार्ग का पथिक और मेरे पिता एवं हिंदू संगठन आदि पुस्तकों के विषय में निवेदन करते हुए कहा कि ये पुस्तक केवल पुस्तक नहीं है अपितु कल्याण मार्ग का पथिक स्वामी श्रद्धानन्द जी द्वारा लिखित उनकी आत्मगाथा है। मेरे पिता स्वामी जी के सुपुत्र श्री इंद्र जी द्वारा लिखित और हिंदू संगठन स्वयं स्वामी श्रद्धानन्द जी द्वारा लिखित ऐसी प्रेरक पुस्तकें है जिनको पढ़कर हम आर्य समाज के उद्देश्यों को पूर्ण करने के लिए प्रेरणा प्राप्त कर सकते है। विनय जी ने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि भारत सरकार द्वारा नागरिक संसशोधन  कानून बनाए जाने का आर्य समाज पूर्ण रूप से समर्थन करता है और सभी आर्यजनों ने ओम् ध्वनि के साथ इस कानून का पुरजोर समर्थन किया। इस अवसर पर हजारों आर्यजनों ने नागरिक संसशोधन कानून के लिए हस्ताक्षर भी किए।

आर्य समाज के हर कार्यक्रम में सहभागी होगा डी.एव.वी. संस्थान-एस.के.शर्मा

       स्वामी श्रद्धानन्द को श्रद्धाजलि  देते हुए डी.एव.वी. मैनजिंग कमेटी के प्रधान श्री पूनम सूरी जी की ओर से श्री एस.के.शर्मा जी महामंत्री प्रादेशिक सभा ने श्री पूनम सूरी जी के विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्री पूनम जी इस सभा में अवश्य आना चाहते थे लेकिन किन्हीं आवश्यक कार्यों से उन्हें बिहार जाना पड़ा। इसलिए उनकी ओर से मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि वे आर्य समाज के प्रचार-प्रसार में हर तरह से सक्रिय भूमिका निभा रहे है। उनकी पूनम की पाठशाला में किस तरह से आर्य समाज को आगे बढ़ाया जाए और नौजवानों को यज्ञ, योग, स्वाध्याय से जोड़ा जाए इसकी प्रमुखता रहती है। उनका कहना है कि हर डी.एव.वी संस्था में यज्ञशाला बने और प्रतिदिन यज्ञ किया जाए। भविष्य में जो भी कार्यक्रम आर्य समाज का होगा उसमें डी.एव.वी की सहभागिता अवश्य होगी।

कल्याण मार्ग का पथिक का स्वाध्याय करें-विनय विद्यालंकार

       सार्वजनिक सभा के मुख्य वक्ता श्री विनय विद्यालंकार जी ने स्वामी श्रद्धानन्द जी का पुण्य स्मरण करते हुए उनके जीवन से जुड़ी कई विशेष बातों का मार्मिक वर्णन किया और सभी आर्यजनों को स्वामी श्रद्धानन्द जी से प्रेरणा लेने की बात कहीं। श्री विनय विद्यालंकार जी ने आर्यजनों से निवेदन किया कि जहां आप वेद, सत्यार्थ प्रकाश, ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका और अन्य आर्ष ग्रंथों का स्वाध्याय करते है। वहीं कल्याण मार्ग का पथिक का स्वाध्याय करें। इस पुस्तक से स्वामी श्रद्धानन्द का संदेश, उपदेश और प्रेरणा प्राप्त होगी।

पूर्ण हो रही है स्वामी श्रद्धानन्द की कामना-धर्मपाल आर्य

       दिल्ली सभा के प्रधान श्री धर्मपाल आर्य जी ने स्वामी श्रद्धानन्द जी को श्रद्धाजलि देते हुए अपने उद्बोधन में कहा कि आज स्वामी श्रद्धानन्द की कामना पूर्ण हो रही है। अछूतों को गले से लगा हिंदूआ वरना ये गैरों के हो जाएंगे स्वामी श्र(ानंद द्वारा संचालित शु(ि आंदेालन, पिछ़डों को गले लगाने की भावना, देश की स्वाधीनता संग्राम में योगदान और अन्य अनेक सेवा कार्य मानव मात्र के लिए अत्यंत कल्याणकारी सिद्ध हुए। ये समस्त कार्य आर्य समाज निरंतर आगे बढ़ा रहा है। सभी आर्यजनों को संकल्प लेना चाहिए कि हम भी उनके बताए रास्ते पर आगे बढ़े।

स्वामी श्रद्धानन्द के पदचिंहों पर चल रही है भारत सरकार-मोनिका अरोड़ा

       सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील एवं अपने प्रखर वाणी के लिए विख्यात श्रीमती मोनिका अरोड़ा जी ने स्वामी श्रद्धानन्द जी के 93वें बलिदान दिवस पर उन्हें शत-शत नमन करते हुए उद्बोधन में कहा कि वर्तमान भारत सरकार स्वामी श्रद्धानन्द के पदचिंहों पर ही चल रही है। नागरिक संसशेधन कानून का हवाले देते हुए श्रीमती मोनिका जी ने अपनी ओजस्वी वाणी से यह स्पष्ट कहा जो लोग तुष्टीकरण की राजनीति करते है उन्हें यह अवश्य समझना चाहिए कि जन्म से, वंश से या पंजीकरण से देश का नागरिक होना बहुत जरूरी है। यह कानून कते भी जन विरोधी नहीं है। बल्कि भारत के उज्ज्वल भविष्य की साफ तस्वीर है। श्रीमती मोनिका जी ने एन.आर.सी एवं अनेक अन्य सरकार के कार्यों की प्रशंसा करते हुए अपना विस्तृत उद्बोधन देकर आर्यजनों को लाभान्वित किया।

पुण्य भूमि की मिट्टी से तिलक लगाओ माथे पर-डाॅ. सत्यपाल सिंह

       बागपत लोक सभा से सासंद, मानव संसाधन राज्य मंत्री एवं गुरुकुल कांगड़ी के कुलाधिपति डाॅ. सत्यपाल सिंह जी ने इस अवसर पर स्वामी श्रद्धानन्द जी के सेवा कार्यों का पुण्य स्मरण करते हुए अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि गुरुकुल कांगड़ी का कुलाधिपति बनाने के लिए पंजाब, हरियाणा और दिल्ली की तीनों सभाएं पहली बार एक साथ आयी यह अपने आपमें एक बहुत बड़ी बात है। तीनों सभाएं अपने आपमें अद्भूत और अनुपम है। जिस गुरुकुल कांगड़ी को स्वामी श्रद्धानन्द ने स्थापित किया उसका कण-कण पवित्र है। गुरुकुल की मिट्टी को माथे पर लगाकर तो देखो उसमें श्रद्धा की खुशबू है। ऐसे स्वामी श्रद्धानन्द जिन्होंने अपना सर्वस्व देश को अर्पित कर दिया। मानवता के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। ऐसे स्वामी श्रद्धानन्द को शत-शत नमन।

       स्वामी श्रद्धानन्द जी का बलिदान 23 दिसंबर को हुआ था। और बलिदान दिवस की शोभायात्रा दिल्ली में 25 दिसंबर को आयोजित की जाती है। 23 से 25 तक राष्ट्र समाचार पत्रों में एम.डी.एच. परिवार व आर्य प्रचार ट्रस्ट की तरफ से पूरे पेज पर स्वामी श्रद्धानन्द जी का चित्र तथा चरित्र का वर्णन किया जाता है और उनको श्रद्धाजलि दी जाती है।

नाटिका मंचन

       स्वामी श्रद्धानन्द का विशाल शरीर और बलवान आत्मा तथा उनके द्वारा किए गए मानव सेवा के कार्य उनकी महान महिमा का यशोगान गाते है। इस अवसर पर आर्य समाज कीर्ति नगर में गतिशील आर्य वीर दल की शाखा द्वारा आर्यवीर राजू आर्य के निर्देशन में, एक विशेष नाटिका का मंचन किया गया। जैसे ही यह नाटिका मंच पर प्रारंभ हुई तो सभी लोग ध्यान मगन होकर देखने लगे। किस तरह से ब्रिटिश हुक्मत के टाईम में स्वामी श्रद्धानन्द जी ने गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की थी। और वहां पर किस-किस तरह से उस समय का प्रशासन अवरोध पैदा करता था। लेकिन महर्षि दयानंद के अनन्य भक्त स्वामी श्रद्धानन्द जी ने इतनी श्रद्धा से कार्य किया कि जो युगो-युगो तक याद किया जाएगा। नाटक में रोलेट एक्ट का विरोध जिसमें स्वामी जी ने संगीनों के सामने छाती खोलकर कहा था चलाओ गोली का भी उल्लेख किया। इस प्रेरणाप्रद नाटिका को देखकर सभी लोग प्रेरित हुए।

सम्मान

       इस अवसर पर समाज के कार्यकत्र्ताओं में श्रीमती नीरज मेदींरत्ता धर्मपत्नी श्री दीपक मेदींरत्ता जी को श्री वेदप्रकाश कथूरिया स्मृति पुरस्कार, आ. कल्पना जी व श्री आशीष आर्य सुपुत्र श्री बलवान सिंह ठाकरान को श्री लख्मी चन्द भूरो देवी स्मृति पुरस्कार व आ. शिवशंकर चर्तुवेदी सुपुत्र श्री बाल कृष्ण को महात्मा प्रभु आश्रित स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

एम.डी.एच. का निमंत्रण

       आर्य समाज के द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक आयोजन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले सहयोगी एम.डी.एच. कंपनी की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर इंद्रागांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित होने वाले 11 जनवरी 2020 के आयोजन का निमंत्रण स्वयं महाशय धर्मपाल जी ने आर्यजनों को दिया। इस अवसर पर एम.डी.एच. परिवार से प्रेम अरोड़ा जी तथा श्री राजेंद्र जी भी उपस्थित थे। विनय जी ने सभी आर्यजनों से इस कार्यक्रम में भाग लेने का आहवान किया। महाशय धर्मपाल जी ने सभी आर्यजनों को आगे बढ़कर आर्य समाज के कार्यों को करने की प्रेरणा दी और आशीर्वाद दिया। डॉ  विनय विद्यालंकार जी ने शांति पाठ कराया और सभा विसर्जित हुई।

सतीश चड्ढा (महामंत्री) आर्य केन्द्रीय सभा (दिल्ली) राज्य

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