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गाँधी के राष्ट्रपिता होने पर मेरे सवाल

May 18 • Samaj and the Society • 115 Views • No Comments

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मध्य प्रदेश की भोपाल संसदीय सीट से भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने महात्मा गांधी की हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था। हालांकि भाजपा ने उनके उस बयान से किनारा कर लिया। जिसके बाद साध्वी प्रज्ञा ने उस बयान पर माफी मांगी। इसी दौरान एक अन्य भाजपा नेता अनिल सौमित्र ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा की इसमें उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान का जन्म बापू के आशीर्वाद से हुआ था। वे राष्ट्रपिता थे लेकिन पाकिस्तान के, भारत राष्ट्र में उनके जैसे करोड़ों पुत्र हुए कुछ लायक तो नालायक।

हालंकि इसके बाद उन्हें उनके पद से हटा दिया गया है लेकिन दो दिनों तक चली इस राजनीति चर्चा में सवाल जरुर खड़े हो गये और सवाल ऐसे है कि जिन पर प्रत्येक राजनितिक दलों के अपने अलग-अलग विचार और मत है। पर सवाल ये है कि एक आम भारतीय की इन सवालों पर क्या राय.है। क्या गाँधी जी सच में देश के राष्ट्रपिता है? और दूसरा ये कि गाँधी जी और गोडसे की राष्ट्रभक्ति के लिहाज से कौन बड़ा देशभक्त है?

अगर पहला सवाल ही देखा जाये तो कई चीजें सामने निकालकर आती है मसलन गाँधी जी भारत के राष्ट्रपिता कैसे है? यही सवाल अक्तूबर साल 2012 में कक्षा 6 में पढने वाली एक बच्ची ऐश्वर्या ने सूचना के अधिकार के तहत माँगा था कि महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता क्यों कहा जाता है? उस समय देश में भाजपा की नहीं बल्कि कांग्रेस की सरकार थी और तब भारत के केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा था वह राष्ट्रपिता नहीं है और न ही सरकार महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की उपाधि दे सकती। क्योंकि देश का संविधान शैक्षिक और सैन्य उपाधि के अलावा कोई और उपाधि देने की इजाजत नहीं देता।

अब इसी में दूसरा सवाल छिपा है कि यदि सरकार ऐसी उपाधि नहीं दे सकती तो फिर एक आम भारतीय गाँधी को राष्ट्रपिता क्यों माने? तीसरा सवाल ये भी कि भारत देश करोड़ो वर्षों से कोई भूमि का टुकड़ा नहीं बल्कि आस्था संस्कार और संस्कृति संजोये एक जीता जागता महापुरुष है और इस महापुरुष का पिता ईश्वर के अलावा कोई दूसरा कैसे हो सकता है। भारत देश गाँधी से पहला है न कि गाँधी जी के बाद इसका जन्म हुआ। हाँ भाजपा नेता अनिल सौमित्र के इस बयान में जरुर दम है कि गाँधी जी के कारण ही पाकिस्तान का जन्म हुआ जिसका 1947 से पहले कोई वजूद नहीं था इस कारण उन्हें पाकिस्तान का पिता कहने में कोई शर्म की बात नहीं होनी चाहिए।

इसके अलावा अब यदि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर द्वारा नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहा जाना भी कई सवाल लिए खड़ा है क्योंकि कानून नाथूराम को गाँधी जी का हत्यारा तो कह सकता है लेकिन नाथूराम की देशभक्ति पर सवाल कैसे खड़े कर सकता है? सिर्फ इस बात पर कि गाँधी जी और नाथूराम में वैचारिक मतभेद था और एक व्यक्ति ने दूसरे पर हमला कर दिया था? तो एक देशभक्त और दूसरा देशद्रोही कैसे हो गया? यदि ऐसा है तो फिर इतिहास में देशभक्ति की परिभाषा ही दूसरी लिखनी पड़ेगी क्योंकि स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती के हत्यारे को खुद गांधी के बयान ने ही बचाया था। जब 1926 में जिस अब्दुल राशिद नाम के व्यक्ति ने उनकी हत्या की थी गांधी ने उसका बचाव मेरा भाई  कहकर किया था। गांधीजी प्रयासों से राशिद को छोड़ दिया गया। यह जानते हुए भी कि स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती उस समय देश के सबसे बड़े आजादी के सिपाही थे। क्या अब हम स्वामी श्रद्धानन्द की देशभक्ति और गाँधी जी की देशभक्ति को अलग-अलग तोले?

वैचारिक मतभेद किसके नहीं थे कोई बदले में अपराध गया तो कोई नहीं कर पाया। कौन नहीं जानता कि नेहरु और पटेल के भी वैचारिक मतभेद थे तो भगतसिंह और गाँधी जी भी। यदि इतिहास के कुछ पन्ने खोले तो दूसरे गोल मेज सम्मेलन के बाद बोस ने गांधी जी पर सीधे तौर पर हमला किया था। गांधी जी ने इस सम्मेलन में अल्पसंख्यक का मुद्दा उठाया था जबकि बोस का आरोप था कि यहां भारत की आजादी को लेकर बात होनी चाहिए थी। इस मुद्दे पर गांधी जी की वजह से नेहरू और बोस के बीच दूरियां बढ़नी शुरू हो गई थी। यही नहीं गांधी और नेहरू, बोस के आजाद हिंद फौज के गठन के फैसले के खिलाफ थे और बोस पर लिखी गई कई किताबों में इस तथ्य का भी जिक्र है कि भारत की आजादी के जिस दस्तावेज पर नेहरू ने हस्ताक्षर किए थे उसमें यह भी लिखा था कि यदि बोस आजाद भारत में भी लौटेंगे तो उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। इसके बाद स्वयं भारत के संविधान निर्माता आंबेडकर जी ने अपने लिखे एक ख़त में गाँधी जी की हत्या को जायज बताया था और गोपाल गोडसे की पुस्तक गाँधी वध क्यों में सरोजनी नायडू का कथन छपा है कि जब गाँधी जी लाश के पास लोग रो रहे थे तब सरोजनी ने कहा था क्यों रो रहे हो कुछ दिन बाद कब्ज होकर भी तो मरता।

अब इस सवाल का जवाब कौन देगा कि जिन-जिन लोगों से गाँधी जी के वैचारिक मतभेद थे क्या वह सब देशद्रोही थे, क्योकि इस हिसाब से बोस, पटेल, भगतसिंह, बिस्मिल भगवतीचरण बोहरा समेत सभी क्रन्तिकारी और नेता देशद्रोही हुए और सिर्फ नेहरु जी और गाँधी जी देशभक्त? जबकि 15 नवंबर 1949 को जब नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को फाँसी के लिए ले जाया गया तो उनके एक हाथ में गीता और अखंड भारत का नक्शा था और दूसरे हाथ में भगवा ध्वज। फाँसी का फंदा पहनाए जाने से पहले उन्होंने नमस्ते सदा वत्सले का उच्चारण किया और नारे लगाए. क्या ऐसा करने वाले देशद्रोही हो सकते है?

चलो कुछ लोगों के अनुसार एक पल को यदि ऐसा मान भी ले तो गाँधी के पुत्र देवदास गाँधी ने तो गोडसे को क्षमादान देने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था फिर क्यों एक देशद्रोही को गाँधी जी का पुत्र बचा रहा था। ऐसे सवालों के जवाब न नेता देंगे और न वामपंथी इतिहासकार जबकि सवाल आज भी खड़े होकर पूछ रहे कि यदि गोडसे देशद्रोही और गाँधी जी का हत्यारा था तो बंटवारे में 10 लाख लोग किनके कारण मारे गये थे बटवारे की लाशों का जिम्मेदार कौन है यह भी हमें जरुर बताया जाये?

 राजीव चौधरी 

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